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चीन में नए क़ानून का प्रस्ताव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन ने पहली बार एक ऐसे क़ानून का प्रस्ताव किया गया है जिसके तहत उसे ताइवान के ख़िलाफ़ बल प्रयोग करने की अनुमति मिल जाएगी. इसके तहत चीन ताइवान के ख़िलाफ सैन्य कार्रवाई कर सकता है अगर ताइवान को शांतिपूर्वक तरीकों से चीन में शामिल करने का प्रयास विफल हो जाए. चीन ताइवान को ऐसा प्रांत मानता है जो उससे अलग है. चीन ने बार बार चेतावनी दी है कि अगर ताइवान ने और अधिक आज़ादी मांगी तो उस पर हमला किया जा सकता है. बीबीसी के बीजिंग संवाददाता का कहना है कि किसी को भी इस क़ानून में कुछ भी स्पष्ट पता चल पाने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए क्योंकि संसद में इस क़ानून के बारे में जो भी बताया गया है वह बहुत कम और अस्पष्ट है. संवाददाता का कहना है कि क़ानून में यह तक नहीं बताया गया है कि ताइवान के ख़िलाफ़ किन परिस्थितियों में बल प्रयोग किया जा सकता है. इस क़ानून को लेकर कई महीनों से कयास लगाए जा रहे थे लेकिन चीनी नेताओं ने इसके बारे में बहुत ही गुप्त रवैया अपना रखा था. 1949 में ताइवान ने खुद को चीन के मुख्य भूभाग से अलग कर लिया था. ताइवान के नेताओं ने चीन के इस क़ानून पर कड़ी आपत्ति ज़ाहिर की है. उनका कहना है कि यह क़ानून ताइवान की संप्रभुता की अनदेखी करता है और क्षेत्र में तनाव बढ़ाता है. |
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