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राइस को चीनी क़ानून के आदर की सलाह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी विदेश मंत्री कोंडोलीज़ा राइस ने अपनी छह एशियाई देशों की यात्रा के अंतिम चरण में चीनी नेताओं से बातचीत की है. चीनी राष्ट्रपति हु जिंताओ ने राइस से कहा कि ताइवान की आज़ादी की आकांक्षाओं पर रोक लगाने वाले नए चीनी क़ानून का उद्देश्य है क्षेत्र में शांति और स्थिरता लाना. उल्लेखनीय है कि अमरीका नए चीनी क़ानून का ख़ुला विरोध जता चुका है. राइस रविवार को चीनी प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ से भी मिली. जिआबाओ ने कहा कि अमरीका को चीनी क़ानून का आदर करना चाहिए. राइस सोमवार को भी बीजिंग में चीनी नेताओं के साथ बातचीत जारी रखेंगी. अमरीकी चाहता है कि चीन उत्तर कोरियाई परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने के प्रयासों में तेज़ी लाए, और वह उत्तर कोरिया को वार्ताओं में फिर से शामिल होने के लिए प्रेरित करे. पिछले महीने उत्तर कोरिया छह पक्षीय वार्ताओं से बाहर निकल गया था. बीजिंग आगमन से पहले राइस ने उत्तर कोरिया मामले पर टिप्पणी की, "हमें इस विवाद का समाधान करना है. यह अनंत काल तक नहीं चल सकता." उधर चीन हमेशा यह कहता रहा है कि उत्तर कोरिया पर उसका सीमित प्रभाव है, और समस्या के समाधान के लिए अमरीका को अपने रूख़ में लचीलापन लाना चाहिए. |
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