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हु जिंताओ ने अंतिम शीर्ष पद भी सँभाला | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन की संसद ने राष्ट्रपति हु जिंताओ को सेना का प्रमुख बनाने के फ़ैसले पर मुहर लगा दी है. अभी तक ये ज़िम्मेदारी पूर्व राष्ट्रपति जियाँग ज़ेमिन के ही हाथ में थी. इस तरह अब जिंताओ ने पूर्व राष्ट्रपति जियाँग ज़ेमिन से पूरी तरह सत्ता हाथ में ले ली है. वैसे हु जिंताओ का सेना प्रमुख बनाना एक सांकेतिक क़दम ही था. उन्हें पिछले वर्ष सितंबर में ही कम्युनिस्ट पार्टी के एक समानांतर आयोग का अध्यक्ष बना दिया गया था और यही आयोग चीन में सेना का काम देखता है. चीन की संसद, नेशनल पीपुल्स कांग्रेस, में मतदान के बाद हु जिंताओ को सर्वसम्मति से सेना प्रमुख बनाया गया. संसद की स्वीकृति के बाद अब हु जिंताओ तीन शीर्ष पदों पर पहुँच गए हैं. 62 वर्षीय हु जिंताओचीन की कम्युनिस्ट पार्टी के प्रमुख हैं, चीन के राष्ट्रपति हैं और अब सेना के भी प्रमुख बन गए हैं. शिखर यात्रा हु जिंताओ, 78 वर्षीय जियांग ज़ेमिन के बाद 2003 में चीन के राष्ट्रपति बने थे. वे चीन में शीर्ष पद पर पहुँचनेवाले ऐसे पहले नेता हैं जिनका राजनीतिक जीवन 1949 में चीन में कम्युनिस्टों के सत्ता में आने के बाद शुरू हुआ. इंजीनियरिंग की शिक्षा प्राप्त जिंताओ चीन के ऐसे युवा प्रशासकों में थे जिन्हें उनके प्रदर्शन के कारण जल्दी तरक्की मिलती गई. वे चीन के सबसे ग़रीब और सबसे दूरस्थ प्रांतों में पार्टी के पदों पर रह चुके हैं. तिब्बत में पार्टी प्रमुख के तौर पर उन्होंने वहाँ मार्शल लॉ लगाया था. उनके बारे में ये भी कहा जाता है कि उनकी याददाश्त बहुत तेज़ है और वे कोई भी दृश्य या चित्र याद रख सकते हैं. |
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