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चीनी मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चीन में पाँच से भी ज़्यादा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने यूरोपीय संघ को एक पत्र लिखकर माँग की है कि चीन के ख़िलाफ़ हथियार प्रतिबंध नहीं हटाए जाने चाहिए. चीन के ख़िलाफ़ हथियार प्रतिबंध 1989 में बीजिंग के थ्यानमन चौक में हुए प्रदर्शनों के बाद लगाए गए थे. उन प्रदर्शनों को सरकार ने दबा दिया था. यूरोपीय संघ की विदेश नीति के प्रमुख ज़ेवियर सोलाना कहते रहे हैं कि चीन के ख़िलाफ़ लगे हथियार प्रतिबंध अनुचित हैं क्योंकि मानवाधिकार मामले में चीन ने सुधार किया है. लेकिन चीन के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने जो पत्र लिखा है उससे कुछ और ही तस्वीर उभरती है. बीजिंग में बीबीसी संवाददाता लुइसा लिम ने कहा है कि चीन के अंदर मानवाधिकार कार्यकर्ता अब इस बहस में शामिल हो रहे हैं कि यूरोपीय संघ को हथियार प्रतिबंध हटाने चाहिए या नहीं. जिन पाँच से भी ज़्यादा मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने यूरोपीय संघ को प्रतिबंध नहीं हटाए जाने की माँग करते हुए पत्र लिखा है उनमें 1989 के लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों में भाग ले चुके अनेक लोग शामिल हैं. इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि चीन में मानवाधिकार स्थिति में पिछले 16 सालों में कोई सुधार नहीं हुआ है. इन्होंने पत्र में कहा है, "चीन सरकार अब भी दमनकारी है, हालाँकि अंतरराष्ट्रीय निंदा से बचने के लिए कुछ नपेतुले क़दम उठाए जाते हैं. इतना ही नहीं, आर्थिक विकास के माहौल में कुछ अधिकारों का उल्लंघन कुछ नए तरीक़े से किया जाता है." पत्र में कहा गया है कि चीन में मानवाधिकार हालात में निश्चित सुधार के बिना हथियार प्रतिबंध हटाए जाने से चीनी लोगों में ग़लत संदेश जाएगा. इन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने माँग की है कि 1989 की घटना की स्वतंत्र जाँच कराई जानी चाहिए और क़ैदियों को रिहा किया जाना चाहिए. यह पत्र ऐसे समय में लिखा गया है जब ब्रिटेन की एक संसदीय समिति ने आगाह किया कि चीन के ख़िलाफ़ हथियार प्रतिबंध हटाने से अमरीका के साथ व्यापार संबंधों पर असर पड़ सकता है. अमरीका चीन पर लगे हथियार प्रतिबंध हटाने का विरोध करता रहा है, उसकी आशंका है कि इससे एशिया में सैन्य शक्ति संतुलन बिगड़ सकता है. |
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