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सीमा विवाद पर भारत-चीन बातचीत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लाओस में आसियान बैठक के दौरान भारत और चीन के प्रधानमंत्रियों ने द्विपक्षीय सीमा विवाद पर चर्चा की है. भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और चीनी प्रधानमंत्री वेन जिआबाओ के बीच 40 मिनट की बातचीत में दोनों नेताओं ने स्वीकार किया कि भारत-चीन सीमा विवाद एक जटिल मुद्दा है. समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मनमोहन सिंह ने चीनी प्रधानमंत्री से कहा द्विपक्षीय सीमा विवाद का हल एक-दूसरे के हितों का ध्यान रखते हुए ही किया जा सकता है. हालाँकि उन्होंने कहा कि लेकिन ऐसा करते हुए ज़मीनी वास्तविकताओं पर गौर करना ज़रूरी होगा. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेएन दीक्षित ने पत्रकारों को यह जानकारी दी. 'ज़मीनी वास्तविकताओं' के बारे में पूछे जाने पर दीक्षित ने कहा कि इसका मतलब है चीन को मान लेना चाहिए कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न अंग है. उल्लेखनीय है कि चीन इस राज्य के एक बड़े भूभाग पर अपना अधिकार जताता है. जटिल विवाद समाचार एजेंसियों के अनुसार मनमोहन सिंह से बातचीत में चीनी प्रधानमंत्री जिआबाओ ने दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को जटिल बताया. उन्होंने कहा कि सीमा विवाद के समाधान में समय लग सकता है और इसके लिए विश्वास, धैर्य और राजनीतिक इच्छा शक्ति की दरकार है. मनमोहन सिंह ने ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री जॉन हॉवर्ड से भी द्विपक्षीय बातचीत की. उन्होंने भारतीय कंप्यूटर विशेषज्ञों को ऑस्ट्रेलियाई वीज़ा लेने में आने वाली मुश्किलों का ज़िक्र किया. |
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