| भारत-आसियान बैठक लाओस में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तीसरे भारत-आसियान बैठक के लिए प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार को लाओस पहुँच गए हैं. ये बैठक 29 और 30 नवंबर को होनी है और इसमें भारत-आसियान देशों के बीच शांति और व्यापार विस्तार के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. लाओस में इस समय दसवें आसियान सम्मेलन चल रहा है और इसी के बीच भारत-आसियान बैठक होगी. लाओस के लिए रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत पूर्वी एशिया के अपने पड़ोसी देशों के साथ मज़बूत संबंध बनाना चाहता है. उनका कहना था, “प्राचीन सभ्यताओं के समय से ही पूर्वी एशियाई देशों के साथ भारत के प्रगाढ़ संबंध रहे हैं.” दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के संगठन (आसियान) के दस देशों के साथ भारत का एक महत्वपूर्ण समझौता होने जा रहा है जिसके तहत आसियान देशों के साथ भारत का व्यापार 2007 तक 30 अरब डॉलर तक होने की संभावना है. शनिवार को आसियान देशों के विदेश मंत्रियों के साथ बैठक के बाद भारत के प्रधानमंत्री नटवर सिंह इस समझौते की सहमति बना चुके थे. संभावना है कि इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह चीन, दक्षिण कोरिया और जापान के राष्ट्र प्रमुखों से अलग से मुलाक़ात भी करेंगे. वे तीस नवंबर को ही भारत वापस लौटेंगे क्योंकि पहली दिसंबर से संसद का शीतकालीन सत्र शुरु होने जा रहा है. |
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