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'मक़सद चीन को अलग-थलग करना नहीं' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के साथ परमाणु करार को मील का पत्थर करार देते हुए विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि इसका मक़सद चीन को अलग-थलग करना नहीं है. दक्षिण कोरिया के दौरे पर गए प्रणव मुखर्जी ने कहा कि बीजिंग को किसी भी रूप में घेरने का भारत का कोई इरादा नहीं है. साथ ही मुखर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि समझौते को लेकर उभरे मतभेदों के कारण अमेरिका के साथ रिश्तों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. मुखर्जी का कहना था कि भारत दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों के साथ हर स्तर पर सहयोग बढ़ाना चाहता है. उन्होंने कहा कि भारत ने वर्षों पहले ‘पूर्व की ओर देखो' की नीति बनाई थी और इस पर वह आगे बढ़ रहा है. दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री सोंग मिन-सून के साथ मुलाक़ात के बाद मुखर्जी ने उम्मीद जताई कि परमाणु समझौते के क्रियान्वयन के लिए परमाणु आपूर्तिकर्ता देशों के संगठन (एनएसजी) के साथ होने वाली चर्चा में दक्षिण कोरिया का सहयोग मिलेगा. दक्षिण कोरिया एनएसजी के 45 देशों में शामिल है. दोनों देशों के बीच नौवहन समझौते और समग्र आर्थिक साझीदारी समझौते को इस साल के अंत तक अंतिम रूप देने पर सहमति बनी. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नवतेज सरना ने कहा, “वे असैनिक परमाणु ऊर्जा की हमारी ज़रूरतों से वाक़िफ़ हैं. जब भी यह मुद्दा एनएसजी में आएगा, हम उम्मीद करते हैं कि दक्षिण कोरिया इस पर सकारात्मक रूख़ अपनाएगा.” | इससे जुड़ी ख़बरें 'भारत-ईरान गैस लाइन पर मतभेद दूर'29 जून, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर की वापसी 18 अक्तूबर को14 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस नवाज़ का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा11 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'जब ख़ुमैनी बनने का ख़्वाब पुलिस के इरादों से टकराया...'11 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस लौट के नवाज़ सऊदी अरब आए10 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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