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'भारत-ईरान गैस लाइन पर मतभेद दूर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार पाकिस्तान के रास्ते भारत में आने वाली भारत-ईरान गैस पाइप लाइन से संबंधित अधिकतर मतभेद दूर हो गए हैं. गैस के मूल्य से जुड़े मतभेदों को दूर होने के साथ-साथ ये भी दावा किया गया है कि ईरान ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ को तेहरान आकर तीनों देशों के बीच इस पाइप लाइन समझौते पर हस्ताक्षर करने का न्यौता दिया है. भारत के एक वरिष्ठ राजनयिक तल्मीज़ अहमद ने बीबीसी के साथ इस बात की पुष्टि की कि इस विषय पर अधिकतर मतभेद दूर हो गए हैं. भारत-ईरान पाइप लाइन का लगभग एक हज़ार किलोमीटर का हिस्सा पाकिस्तान के होकर आएगा और इसके लिए भारत को उसे ट्रांज़िट शुल्क देना होगा. भारत के पेट्रोलियम सचिव एसएस श्रीनिवासन के अनुसार इस शुल्क का आकलन किस प्रकार किया जाए, इस मुद्दे पर दोनों देशों के बीच सैद्धांतिक सहमति बन गई है. 'तमाम मुद्दों पर सहमति' इस बारे में अंतिम फ़ैसला करने के लिए भारत और पाकिस्तान के तेल मंत्रियों की बैठक अगले महीने इस्लामाबाद में होने की संभावना है. जब पाकिस्तान के पेट्रोलियम सचिव अहमद वक़ार से इस बारे में पूछा गया तो उनका कहना था, "जो द्विपक्षीय बातचीत हुई है उसमें एक-दो मुद्दों को छोड़कर तमाम मुद्दों पर सहमति बन चुकी है. अगले माह भारत के पेट्रोलियम मंत्री पाकिस्तान आएँगे और इस पर आगे चर्चा होगी." उधर वरिष्ठ भारतीय राजनयिक तल्मीज़ अहमद का कहना था, "तीनों देशों के लिए ये परियोजना अहम है. भारत-पाकिस्तान की बात शुल्क पर होगी. सुरक्षा को मुद्दा तो रहता ही है. ये परियोजना कोई दो देशों की परियोजना नहीं है. इस परियोजना की मालिक निजी क्षेत्र की कंपनी या कंपनियाँ होंगी जो अंतरराष्ट्रीय वणिज्य नियमों के तहत काम करेगी." उनका कहना था कि सुरक्षा का मुद्दा तो रहता ही है लेकिन वे इस बात से ज़्यादा चिंतित नहीं हैं कि ये पाइप लाइन पाकिस्तान से होकर भारत में आएगी. अमरीका की आपत्ति भारत-ईरान पाइप लाइन पर अमरीका समय-समय पर आपत्ति जताता आया है. भारतीय अख़बार द हिंदू के वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ वर्दराजन का कहना है कि भारत की कूटनीति के लिए ये अहम चुनौती है भारत-अमरीका परमाणु समझौते के साथ-साथ वह भारत-ईरान गैस पाइप लाइन को किस तरह से अंजाम देता है. का कहना है, "अमरीका बार-बार ये कह रहा है कि आप इस दिशा में न जाएँ लेकिन भारत-पाकिस्तान-ईरान के बीच जिस तेज़ी से बात बढ़ रही है उससे नहीं लगता कि इस समझौते को कोई रोक सकता है." उनका ये भी कहना है कि भारत की ऊर्जा ज़रूरतें इतनी बड़ी हैं कि उसके लिए असैनिक मकसदों के लिए अमरीका के साथ परमाणु समझौते के साथ-साथ ईरान गैस पाइप लाइन भी ज़रूरी है. सिद्धार्थ वरदराजन का मानना है कि यदि आम लोगों में ये बात जाती है कि अमरीका के दबाव के कारण भारत को ईरान के साथ गैस पाइप लाइन समझौते से पीछे हटना पड़ रहा है तो उनमें इससे नाराज़गी पैदा होगी. | इससे जुड़ी ख़बरें बुश-मनमोहन की परमाणु मुद्दे पर बात07 मई, 2007 | भारत और पड़ोस 'परमाणु समझौते पर उल्लेखनीय प्रगति'02 मई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु सौदे पर भारत के तेवर कड़े18 मार्च, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु करार पर बुश-मनमोहन की चर्चा21 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति भारत के हित में?22 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस 'नई शर्तें स्वीकार नहीं करेगा भारत'26 जुलाई, 2006 | भारत और पड़ोस 'सामरिक कार्यक्रम पर कोई अंकुश नहीं'07 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका सहमति ऐतिहासिक क्यों?02 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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