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मंगलवार, 08 मई, 2007 को 04:19 GMT तक के समाचार
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बुश-मनमोहन की परमाणु मुद्दे पर बात
बुश और मनमोहन सिंह
परमाणु समझौते के कुछ पहलुओं को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद हैं
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने परमाणु समझौते के संबंध में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से सोमवार शाम को बातचीत की.

राष्ट्रपति बुश ने मनमोहन सिंह से टेलिफ़ोन से संपर्क कर द्विपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के मजबूत करने और परमाणु समझौते के संबंध में बातचीत की.''

राष्ट्रपति बुश ने मनमोहन सिंह को फिर अमरीका आने का न्योता दिया, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया. लेकिन इस यात्रा की तारीख़ बाद में तय की जाएगी.

उल्लेखनीय है कि परमाणु समझौते को लेकर पिछले कुछ दिनों से काफ़ी सरगर्मी चल रही है.

कुछ अमरीकी सांसदों के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को इस संबंध में पत्र लिखने को लेकर संसद में भी तीखे सवाल उठे हैं.

अमरीकी सांसदों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिखकर आगाह किया है कि ईरान के साथ भारत के अच्छे संबंधों से अमरीका के साथ परमाणु सहयोग सहमति पर असर पड़ सकता है.

यह पत्र इसलिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस पर जिन सांसदों ने हस्तक्षर किए हैं उनमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों ही पार्टियों के सदस्य हैं और कई महत्वपूर्ण पैनलों के नेता भी हैं जो परमाणु सहयोग समझौते से संबंधित हैं.

कोशिशें तेज़

दूसरी ओर राष्ट्रपति जॉर्ज बुश भारत के साथ परमाणु सहयोग सहमति के समर्थन में काफ़ी प्रयास कर रहे हैं.

 दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों के मजबूत करने और परमाणु समझौते के संबंध में बातचीत की
संजय बारू, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार

उनका कहना है कि इस सहमति से भारत के साथ अमरीका के संबंधों में एक नया दौर शुरू होगा.

लेकिन परमाणु अप्रसार के हिमायती विशेषज्ञों ने भारत के साथ परमाणु सहयोग का कड़ा विरोध किया है और आशंका जताई है कि इससे परमाणु अप्रसार सुनिश्चित करने वाले नियम कमज़ोर होंगे.

उनका कहना है कि इस समझौते पर अमल से अमरीका एक ऐसे देश यानी भारत को परमाणु तकनीक देगा जिसने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त करने से इनकार कर दिया है.

अमरीकी संसद में इस विधेयक पर बहस के दौरान कुछ सांसदों ने यह भी पेशकश की थी कि इसकी मंज़ूरी के साथ भारत के ईरान के साथ संबंधों का मुद्दा जोड़ दिया जाए.

लेकिन बुश प्रशासन के दबाव की वजह से उसे हटा दिया गया था.

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