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हू जिंताओ से सोनिया गांधी की मुलाक़ात | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में सत्तारूढ़ यूपीए गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी शुक्रवार को चीन के राष्ट्रपति और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव हू जिंताओ से मुलाक़ात कर रही हैं. अपनी यात्रा के दौरान सोनिया गांधी चीन के दो प्रमुख नेताओं से द्विपक्षीय संबंधों के मुद्दे पर बातचीत करने वाली हैं. राष्ट्रपति के अलावा उनकी मुलाक़ात चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ और पोलित ब्यूरो सदस्य ल्यू की से भी होनी है. पाँच दिन के चीन दौरे पर गुरुवार को बीजिंग पहुँची सोनिया गांधी चीन के पूर्व विदेशमंत्री हुआँग हुआ से भी मुलाक़ात करेंगी. सोनिया के साथ उनके बेटे राहुल गांधी भी चीन की यात्रा पर हैं. इसके अलावा वरिष्ठ कांग्रेस नेता कर्ण सिंह और केंद्र सरकार के दो राज्यमंत्री भी चीन गए हुए हैं. महत्वपूर्ण यात्रा चीन में हाल ही में पाँच वर्ष के अंतराल पर होने वाली कम्युनिस्ट पार्टी की कांग्रेस ख़त्म हुई है और उसके बाद राष्ट्रपति हू जिंताओ और प्रभावी भूमिका में सामने आए हैं. इसके बाद से द्विपक्षीय संबंधों को लेकर दोनों देशों के बीच इस बातचीत को कई संदर्भों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. चीन में सोनिया की यात्रा को ख़ासा महत्व दिया जा रहा है. लगभग सभी प्रमुख नेताओं से उनकी मुलाक़ात हो रही है. कुछ जानकार सोनिया गांधी की चीन यात्रा को भारत और अमरीका के बीच प्रस्तावित परमाणु क़रार से भी जोड़कर देख रहे हैं. जानकारों का मानना है कि जापान, भारत और अमरीका के बीच गहरे होते संबंधों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की उभरती छवि को लेकर चीन भी अब सचेत है. | इससे जुड़ी ख़बरें तिब्बत की बदलती तस्वीर20 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस चीन की खूबसूरत बला....शंघाई01 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सीमा विवाद पर चर्चा 'सकारात्मक'27 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस 'मक़सद चीन को अलग-थलग करना नहीं'17 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस भारत, रूस और चीन की बैठक का महत्व17 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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