|
अमिताभ बच्चन मामले में फ़ैसला सुरक्षित | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के बाराबंकी ज़िले में खेतिहर ज़मीन के कथित फ़र्ज़ी कागज़ात बनाने के मामले पर गुरुवार को फ़ैसला सुरक्षित रख लिया. इसके पहले फैज़ाबाद के कमिश्नर ने जाँच के बाद फ़ैसला दिया था कि अमिताभ बच्चन का बाराबंकी ज़िले के दौलतपुर गाँव की ज़मीन पर कोई हक़ नहीं बनता और काग़ज़ात में हेरफेर करके उन्हें ग़लत ढंग से उसका मालिक बताया गया है. फैज़ाबाद के कमिश्नर ने सिफ़ारिश की थी कि इस मामले में अमिताभ बच्चन के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमा चलाया जाना चाहिए. इसको अमिताभ बच्चन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में चुनौती दी थी. इसके पहले अमिताभ बच्चन के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत में हलफ़नामा दायर करके सूचित किया था कि अमिताभ बच्चन ने विवादित ज़मीन पर अपना दावा छोड़ दिया है. उनकी दलील थी कि इसके बाद उनके मुवक्किल के ख़िलाफ़ कोई कानूनी कार्रवाई करने का औचित्य नहीं रह जाता. लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के वकील देवेंद्र उपाध्याय की दलील थी कि मुक़दमा इस बारे में है कि बाराबंकी के जिलाधिकारी ने दस्तावेज़ों की जाँच के बाद पाया था कि अमिताभ बच्चन को ग़लत तरीक़े से उस ज़मीन का मालिक दिखाया गया था जो उनकी नहीं थी. सरकारी वकील का तर्क था कि उनके ऐसा करने का कोई असर उनके ख़िलाफ़ क़ायम अभियोग पर नहीं पड़ेगा. मामला दरअसल, इस विवाद की शुरुआत होती है पुणे में बच्चन परिवार की ओर से एक आठ हेक्टेअर की ज़मीन को ख़रीदने की कोशिश से. पुणे के पास स्थित इस मवाल क्षेत्र में ज़मीन ख़रीदने के लिए ख़रीददार का किसान होना ज़रूरी है. बच्चन परिवार यहाँ पर एक फ़ार्म हाउस बनाना चाहता था. ख़ुद को किसान बताने के लिए उन्होंने जो काग़ज़ात जमा किए उनमें बताया गया था कि अमिताभ बच्चन बाराबंकी में एक भूखंड के मालिक हैं जो कृषि कार्य में इस्तेमाल होती है. ज़मीन के दस्तावेज के मुताबिक 11 जनवरी, 1983 से अमिताभ इस ज़मीन के मालिक हैं. इस दस्तावेज़ को जाँच के लिए संबंधित अधिकारी ने बाराबंकी के जिलाधिकारी के कार्यालय भेजा. तत्कालीन जिलाधिकारी ने इसकी जाँच की और पाया कि यह बात मूल दस्तावेजों में बाद में दर्ज की गई थी. जाँच में यह भी कहा गया कि जिस स्याही से अमिताभ का नाम सरकारी कागज़ों में दर्ज है वो नई है और लिखावट भी दूसरी है. इसके बाद संबंधित लेखपाल को बर्ख़ास्त कर दिया गया और इसे फ़र्ज़ी चकबंदी घोषित करते हुए निरस्त कर दिया गया. यह भी आरोप लगे कि अमिताभ को इस मामले में राज्य की तत्कालीन सरकार से अच्छे संबंधों के कारण यह लाभ मिला. |
इससे जुड़ी ख़बरें अमिताभ ने ज़मीन का दावा छोड़ा12 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस अमिताभ की अर्ज़ी पर यूपी पहुँची पुलिस20 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस अमिताभ ने जेल भेजने की चुनौती दी12 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस अमिताभ को हाईकोर्ट से राहत मिली08 जून, 2007 | भारत और पड़ोस मायावती को 'नहीं मिली' चिट्ठी20 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस अमिताभ बच्चन पर मुक़दमे की सिफ़ारिश04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस कैसे नहीं हैं अमिताभ बच्चन 'किसान'04 जून, 2007 | भारत और पड़ोस 'किसान' अमिताभ की ज़मीन... 29 मई, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||