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'चुनाव तय कार्यक्रम के मुताबिक होंगे' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने कहा है कि इमरजेंसी लागू होने के बावजूद संसदीय चुनाव तय कार्यक्रम के मुताबिक होंगे. इस बीच इमरजेंसी के तीसरे दिन सोमवार को विरोध कर रहे वकीलों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया. मुशर्रफ़ ने देश में बढ़ती चरमपंथी गतिविधियों और न्यायपालिका के 'अनावश्यक हस्तक्षेप' का हवाला देकर कहा था कि इमरजेंसी के सिवाए उनके पास और कोई चारा नहीं था. पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक जनवरी में चुनाव होने हैं लेकिन आशंका जताई जा रही है कि इसमें देरी हो सकती है. चुनाव पर विरोधाभास इससे पहले पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल मलिक अब्दुल क़यूम ने कहा था कि नेशनल एसेंबली को 15 नवंबर तक भंग कर दिया जाएगा और संसदीय चुनाव उसके 60 दिनों के भीतर यानी पहले से घोषित कार्यक्रम के अनुसार जनवरी में करा लिए जाएँगे. दूसरी ओर पाकिस्तान के सूचना उपमंत्री तारिक़ अज़ीम ने बीबीसी से एक बातचीत में कहा कि उनकी अटॉर्नी जनरल से बात हुई है और उन्होंने ऐसा कोई भी बयान देने से इनकार किया है. प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ ने भी इससे कुछ ही समय पहले कहा था कि चुनाव तय कार्यक्रम के अनुसार होंगे. इससे पहले रविवार को शौक़त अज़ीज़ ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि पाकिस्तान में संसदीय चुनाव के बारे में कोई फ़ैसला नहीं किया गया है, उन्होंने ये भी कहा था कि चुनाव को इमरजेंसी के तहत एक वर्ष तक के लिए टाला जा सकता है. अमरीकी विदेश मंत्री कोडोंलिसा राइस ने सोमवार को एक सख़्त बयान जारी करके कहा था पाकिस्तान में संविधान के तहत तय समय पर संसदीय चुनाव होने चाहिए. राइस ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ वादे के अनुरूप सेनाध्यक्ष का ओहदा छोड़ दें. अमरीकी रुख़ मध्य पूर्व की यात्रा के दौरान अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा था कि पाकिस्तान को मिलने आर्थिक और सैनिक सहायता की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी. अमरीका ने पाकिस्तान में इमरजेंसी लगाए जाने पर गहरी चिंता का इज़हार किया है और पाकिस्तान की स्थिति को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है.
इससे पहले पाकिस्तान के सूचना उप मंत्री तारिक़ अज़ीम ने कहा था कि परवेज़ मुशर्रफ़ ने वर्दी उतारने का जो वादा किया था वह इमरजेंसी की वजह से अधर में है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने सुप्रीम कोर्ट से वादा किया था कि वे राष्ट्रपति के तौर पर अपना अगला कार्यकाल शुरू करने से पहले सेनाध्यक्ष का पद छोड़ देंगे. अज़ीम का कहना है कि उनके वादे की शर्त यही थी कि अगर सुप्रीम कोर्ट उनके दूसरे कार्यकाल को मान्यता दे दे तभी वे वर्दी उतारेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ है और देश में इमरजेंसी लग गई है इसलिए अब स्थितियाँ बदल गई हैं. पाकिस्तान में जनवरी में संसदीय चुनाव होने वाले थे लेकिन अब स्पष्ट नहीं है कि चुनाव समय पर हो सकेंगे या नहीं, प्रधानमंत्री शौक़त अज़ीज़ का कहना है कि चुनाव तारीख़ में बदलाव हो सकता है लेकिन इस बारे में कोई फ़ैसला अभी नहीं किया गया है. लाठी चार्ज पाकिस्तान में इमरजेंसी के ख़िलाफ़ वकीलों का प्रदर्शन जारी है. इस्लामाबाद, कराची, लाहौर, पेशावर और क्वेटा से वकीलों के प्रदर्शन की ख़बरें मिली हैं.
कराची में बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि पुलिस ने वकीलों पर बेरहमी से लाठियाँ चलाईं और पचास से अधिक वकीलों को गिरफ़्तार कर लिया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शौकत अज़ीज़ ने स्वीकार किया है कि लगभग पाँच सौ लोगों को अभी तक गिरफ़्तार किया जा चुका है. वकीलों का कहना है कि वे इमरजेंसी के ख़िलाफ़ राष्ट्रव्यापी अभियान चलाएँगे और उन जजों का बहिष्कार करेंगे जिन्हें इमरजेंसी लागू होने के बाद शपथ दिलाई गई है. पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि वकीलों पर लाठी चार्ज और उनकी गिरफ़्तारी की ख़बरों को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है. अफ़वाह और रिहाई इस बीच, पाकिस्तान में अफ़वाहें उड़ी थीं कि जनरल मुशर्रफ़ को उनके घर में नज़रबंद कर दिया गया है.
इस बारे में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने कहा कि यह 'परले दर्जे का मज़ाक है' जिसे गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है. पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने बताया कि 25 से अधिक तालेबान चरमपंथियों को रिहा किया गया है जिनके बदले में तालेबान ने दो सौ से अधिक सैनिकों को रिहा किया है जिन्हें अगस्त महीने में वज़ीरिस्तान में बंधक बना लिया गया था. जिन तालेबान चरमपंथियों को रिहा किया गया है कि उनमें एक नाकाम आत्मघाती बम हमलावर भी है जिसे 24 वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी. नज़रबंदी पाकिस्तान में इस समय बड़ी संख्या में वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता हिरासत में लिए गए हैं. इनके अलावा पाकिस्तान के कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं और जजों को उनके घर पर ही नज़रबंद कर दिया गया है.
जमाते इस्लामी के नेता काज़ी हुसैन अहमद, पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (नवाज़) के अध्यक्ष जावेद हाशमी, पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष आइए रहमान और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ जज राणा भगवान दास उन लोगों में शामिल हैं जिन्हें उनके घर में ही नज़रबंद कर दिया गया है. लेकिन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो और जमीयत उलमा इस्लाम के नेता फ़ज़लुर्रहमान को न तो नज़रबंद किया गया है और न ही उनके कार्यकर्ताओं की धरपकड़ की गई है. इस बीच, पाकिस्तान में कराची का मुख्य शेयर सूचकांक बुरी तरह गिरा है. इमरजेंसी लगने के बाद सोमवार जब बाज़ार पहली बार खुला तो मुंह के बल गिरा, बाज़ार में 635 अंकों की ज़ोरदार गिरावट आई जो कि लगभग पाँच प्रतिशत की गिरावट है. |
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