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पाकिस्तान में चीफ़ जस्टिस बर्ख़ास्त | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान में राष्ट्रपति जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने इमरजेंसी लागू कर दी है और देश के संविधान को निलंबित कर दिया है. उन्होंने राष्ट्र के नाम संदेश में अपने फ़ैसले को सही ठहराते हुए कहा कि वो पाकिस्तान में बढ़ते चरमपंथ को रोकने के लिए ऐसा कर रहे हैं. न्यायाधीश इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी को बर्ख़ास्त कर दिया गया है और उनकी जगह जस्टिस अब्दुल हमीद डोगर को पाकिस्तान का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है. इफ़्तिख़ार मोहम्मद चौधरी ने इमरजेंसी लगाए जाने को असंवैधानिक कहा था. सुप्रीम कोर्ट को सेना ने चारों तरफ से घेर लिया है. साथ ही सेना सरकारी रेडियो और टीवी स्टेशनों में भी घुस गई है. अक्टूबर में हुए चुनावों में राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की जीत की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है और जल्द ही उसका फ़ैसला आने वाला था. कोर्ट को यह तय करना था कि सेना प्रमुख रहते हुए मुशर्रफ़ चुनाव लड़ सकते थे या नहीं. बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लेट ने इस्लामाबाद से बताया कि सरकार को इस बात का भय था कि सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला परवेज़ मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ जा सकता है. हालात जब इमरजेंसी की घोषणा हुई उस समय पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो एक व्यक्तिगत दौरे पर दुबई में थीं.
बेनज़ीर भुट्टो हाल ही में सालों के स्वघोषित देश निकाले के बाद अपने वतन वापस लौटी थीं और आने वाले संसदीय चुनावों में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का नेतृत्व करने वाली थीं. हालांकि इमरजेंसी की घोषणा के तुरंत बाद बेनज़ीर कराची लौट आईं. उन्होंने परवेज़ मुशर्रफ़ के फ़ैसले की निंदा की. अभी यह साफ नहीं हो पाया है कि पाकिस्तान में चुनाव अपने तय समय पर हो पाएगा कि नहीं. पाकिस्तान में जनवरी मे चुनाव होना है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने अपने भाषण में तारीखों का कोई जिक्र नहीं किया लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वो लोकतंत्र कायम रखना चाहते हैं. हाल के महीनों में पाकिस्तान में भारी उथल-पुथल होती रही है और परवेज़ मुशर्रफ़ की अमरीका के 'आतंक के ख़िलाफ़ संघर्ष' की मुहिम में सहयोग देने पर चरमपंथियों की तरफ से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस्लामाबाद से हमारे संवाददाता का कहना है कि राजनीतिक और न्यायिक महत्व के इलाकों को छोड़कर बाकी शहर में जन-जीवन सामान्य है. बारबरा प्लेट का कहना है कि इमरजेंसी के आदेश को पढ़कर लगता है कि मुख्य लक्ष्य न्यायपालिका ही थी. न्यायपालिका पर सरकारी नीति में हस्तक्षेप करने और चरमपंथ के ख़िलाफ़ संघर्ष को कमजोर करने का आरोप है. हमारी संवाददाता का कहना है कि इन बदली परिस्थितियो में अब बेनज़ीक को तय करना होगा कि वो विपक्षियों की अगुआई करते हुए मुशर्रफ़ के ख़िलाफ़ खड़ी हो ती है या हाशिये पर रहते हुए मुशर्रफञ के साथ कोई समझौता होने का इंतजार करती है. |
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