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सोमवार, 29 अक्तूबर, 2007 को 02:20 GMT तक के समाचार
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विदेशी मामले से हो सकती है परेशानी

बेनज़ीर भुट्टो
बेनज़ीर पर स्विटज़रलैंड में भी आरोप लगे हुए हैं
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनज़ीर भुट्टो निर्वासित जीवन से वतन वापसी के बाद आम चुनाव में हिस्सा लेने की तैयारियाँ कर रही हैं.

राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने पाकिस्तान में लग रहे आरोपों के मामले में उन्हें विवादास्पद रुप से क्षमादान दिया है जिसके बाद वो वापस लौटी हैं.

हालांकि सुप्रीम कोर्ट इस क्षमादान को अवैध क़रार दे सकता है. लेकिन अगर कोर्ट इसे वैध ठहरा दे तो भी राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के साथ सत्ता में भागीदारी की बात कर रही बेनज़ीर को पाकिस्तान के बाहर कई मामलों का सामना करना पड़ सकता है.

इनमें से एक मामला स्विट्ज़रलैंड का है जिसमें सन् 2003 में जिनेवा के मजिस्ट्रेट डेनियल डेवॉद ने बेनज़ीर को पैसे के अवैध लेन देन का दोषी पाया था.

उन्होंने अपने फ़ैसले में पाया था कि दो स्विस कंपनियों एसजीएस और कॉटेक्ना से पाकिस्तान सरकार को ठेके देने के बदले बेनज़ीर और उनके नजदीकी सहयोगियों को लगभग 15 मिलियन डॉलर की राशि दलाली में मिली थी.

उन्होंने अपने फ़ैसले में बेनज़ीर और उनके पति आसिफ़ ज़रदारी को 180 दिनों की सज़ा सुनाई थी और 11.9 मिलियन डॉलर की राशि पाकिस्तान सरकार को वापस करने का आदेश दिया था.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा,’’ मुझे अपने फ़ैसले के बारे में कोई संदेह नहीं है क्योंकि ये अनेक वर्षों की जाँच और हज़ारों दस्तावेज़ों के बाद मैंने सुनाया था.’’

बेनज़ीर ने फ़ैसले का विरोध किया था क्योंकि ये उनकी अनुपस्थिति में सुनाया गया था और इस मामले की फिर से सुनवाई हुई थी. अब पूर्व प्रधानमंत्री पर अवैध लेन देन के और भी गंभीर आरोप लगे हैं.

सही नहीं

जब इस मामले के बारे में पूछा गया तो बेनज़ीर के अधिकारियों ने बीबीसी से कहा,’’ ये आरोप उनकी चरित्र हत्या करने का हिस्सा हैं. बेनज़ीर भुट्टो ने कोई ग़ैरक़ानूनी काम नहीं किया है. उन्होंने और उनके पति सीनेटर आसिफ़ ज़रदारी ने हर देश की हर अदालत में अपना पक्ष रखा है.’’

आसिफ़ ज़रदारी, बेनज़ीर के पति
ज़रदारी और भुट्टो कहते हैं कि उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं

पाकिस्तान में अनेक ऐसे लोग हैं जिनका मानना है कि बेनज़ीर भुट्टो और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के बीच समझौता हो जाने के बाद स्विट्ज़रलैंड के मामले अब समाप्त हो जाएंगे.

लेकिन स्विट्ज़रलैंड के क़ानून के मुताबिक यदि पाकिस्तान की सरकार सहयोग करना बंद कर दे तब भी क़ानूनी कार्यवाही अपने आप बंद नहीं होती है.

इस मामले के प्रभारी स्विस जज विंसेंट फोर्नियर ने बीबीसी को बताया कि वो इस सप्ताह इस मामले को जिनेवा के अटार्नी जनरल को सौंपने की योजना बना रहे हैं.

बेनज़ीर के संबंध में एक अंतरराष्ट्रीय मामला इंग्लैंड में चल रहा है. इस मामले में पाकिस्तान सरकार ने आरोप लगाया था कि बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति ने सरे में दलाली के पैसे से 3.4 मिलियन डॉलर में रॉकवुड जैसी बड़ी संपत्ति ख़रीदी.

बेनज़ीर भुट्टो और उनके पति आसिफ़ ज़रदारी इस संपत्ति के स्वामित्व से आठ साल इनकार करते रहे लेकिन अचानक 2004 में ज़रदारी ने स्वीकार किया कि यह उनकी है.

इसके बाद सन् 2006 में इंग्लैंड के एक जज लॉर्ड जस्टिस कॉलिंस, इस संपत्ति के बारे में दिलचस्प निर्णय पर पहुंचे लेकिन यह निर्णय अंतिम नहीं था.

इस बात पर जोर देते हुए कि ये ‘तथ्यों का नतीजा’ नहीं है, कॉलिंस ने कहा था कि पाकिस्तान सरकार के पास भविष्य की अदालती कार्रवाई में ये साबित करने की ‘पर्याप्त संभावनाएँ’ हैं कि बेनज़ीर औऱ उनके पति ने रॉकवुड संपत्ति को ख़रीदना और ठीक कराना ‘भ्रष्टाचार का नतीजा’ था.

जब बीबीसी ने बेनज़ीर भुट्टों के सहयोगियों से रॉकवुड के बारे में पूछा तो उन्होंने इसमें किसी भी तरह के भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार किया लेकिन कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया.

हालांकि ज़रदारी के वकील ने जस्टिस कॉलिंस को बताया कि पाकिस्तान का यह मामला अटकलों पर आधारित है.

लंदन का मामला सिविल है यानी यदि राष्ट्रपति मुशर्रफ़ सरकार फ़ैसला करती है कि वो इसे आगे नहीं बढ़ाएगी तो ये समाप्त हो जाएगा.

इराक़ का मामला

बेनज़ीर भुट्टो पर संयुक्त राष्ट्र के तेल के बदल अनाज घोटाले में भी आरोप हैं.

सन् 2005 में अमरीकी केंद्रीय बैंक के पूर्व प्रमुख पॉल वोल्कर की अध्यक्षता में स्वतंत्र जाँच समिति ने पाया था कि दो हज़ार से अधिक कंपनियों ने 2003 से पहले इराक़ की सद्दाम हुसैन सरकार को अवैध रूप से भुगतान कर संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को तोड़ा था.

इसमें संयुक्त अरब अमीरात स्थित एक कंपनी पेट्रोलाइन एफ़जेडसी भी शामिल थी.

वॉल्कर ने अपनी जाँच में पाया था कि कंपनी ने 144 मिलियन डॉलर के इराक़ी तेल का कारोबार किया और सद्दाम हुसैन की सरकार को दो मिलियन डॉलर का अवैध रूप से भुगतान किया.

पाकिस्तान के नेशनल एकाउंट ब्यूरो के दस्तावेज़ दिखाते हैं कि बेनज़ीर भुट्टो पेट्रोलाइन एफ़जेडसी की प्रमुख थीं.

यदि ये दस्तावेज़ सही हुए और तेल के बदले अनाज संबंधी आरोप साबित हुए तो ये पूर्व प्रधानमंत्री के लिए और ठेस पहुँचाने वाले साबित हो सकते हैं.

स्पेन के अधिकारी पेट्रोलाइन एफ़जेडसी संबंधी वित्तीय लेन देन की जाँच कर रहे हैं.

इतना ही नहीं राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने सार्वजनिक व्यक्तियों के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में क्षमादान का जो फ़ैसला दिया है वो सिर्फ़ 1986 से 1999 के दौरान के मामले ही हैं.

पेट्रोलाइन एफ़जेडसी से लेनदेन इसके बाद का है, इससे लगता है कि सैद्धांतिक रुप से इसमें आरोप लगाया जाना संभव है.

बेनज़ीर भुट्टो हमेशा से भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से इनकार करती आईं हैं और उनके समर्थकों का कहना है कि उनके ख़िलाफ़ आरोप राजनीति से प्रेरित हैं. लेकिन उनकी क़ानूनी अड़चनें अभी दूर नहीं हुईं हैं.

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