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बेनज़ीर ने पैतृक गाँव का दौरा किया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री् और पीपुल्स पार्टी की नेता बेनज़ीर भुट्टो ने भारी सुरक्षा के बीच सिंध प्रांत में लरकाना के पास अपने पैतृक गाँव का दौरा किया है जहाँ उनके पिता पूर्व प्रधानमंत्री ज़ुल्फ़ेकार अली की क़ब्र भी है. बेनज़ीर भुट्टो क़रीब आठ साल के राजनीतिक निर्वासन के बाद 18 अक्तूबर 2007 को वतन वापस लौटी थीं और उसी समय कराची में उनके काफ़िले पर हमला हुआ था जिसमें लगभग 140 लोग मारे गए थे. उस हमले के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक यात्रा है. बेनज़ीर भुट्टो ने अपने पिता ज़ुल्फ़ेकार अली की क़ब्र पर जाकर उन्हें श्रद्धांजलि दी. ग़ौरतलब है कि ज़ुल्फ़ेकार अली भुट्टो की सरकार का तख्तापलट करने के बाद उन्हें चार अप्रैल 1979 को तत्कालीन सैन्य शासक ज़िया उल हक़ के शासनकाल में फांसी दे दी गई थी. ज़ुल्फ़ेकार अली भुट्टो अगस्त 1973 से जुलाई 1977 तक प्रधानमंत्री रहे थे. बेनज़ीर भुट्टो शनिवार को बुलेट प्रूफ़ गाड़ी में सवार होकर जैसे ही अपने गाँव लरकाना के पास गढ़ी ख़ुदाबख़्श गाँव पहुँची, लगभग चार हज़ार लोग वहाँ मौजूद थे और उन्होंने उनके समर्थन में नारे लगाए. बेनज़ीर भुट्टो की सिंध यात्रा से पहले पूरे प्रांत में सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी. जब कराची में वह अपने घर से हवाई अड्डे के लिए रवाना हुईं तो भी कड़ी सुरक्षा रखी गई. कराची हवाई अड्डे से वह एक विमान में सवार होकर सुक्कूर पहुँचीं और इस दौरान उनके साथ मज़बूत सुरक्षा चौकसी रही, यहाँ तक कि जिन रास्तों से वह गुज़रीं वहाँ भी भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात थे. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार भुट्टो ने विमान में ही पत्रकारों से बातचीत में कहा, "मुझे यहाँ आए बहुत समय बीत गया है और अल्लाह का शुक्र है कि उसने मुझे अपनी मातृभूमि पर एक बार फिर क़दम रखने का मौक़ा दिया है." लोकतंत्र की हिफ़ाज़त बेनज़ीर भुट्टो ने कहा, "इससे मुझे लोकतंत्र की हिफ़ाज़त करके पाकिस्तान की सलामती के लिए अपनी क्षमता के अनुसार काम करने की मज़बूती मिली है. पाकिस्तान के लोगों की सुरक्षा, सलामती और बेहतरी के लिए लोकतंत्र की हिफ़ाज़त बेहद ज़रूरी है."
ज़ुल्फ़ेकार अली भुट्टो की क़ब्र पर भी इस मौक़े पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के बहुत से कार्यकर्ता भी हथियारों से लैस थे. उन कार्यकर्ताओं ने क़ब्र की सुरक्षा घेराबंदी कर ली और कुछ मौक़ो पर तो पुलिस को भी उसके भीतर नहीं आने दिया. लरकाना भुट्टो परिवार की राजनीतिक विरासत का केंद्र रहा है और वहाँ इस परिवार की काफ़ी संपत्ति है जिसमें काफ़ी ज़मीन भी शामिल है. इस इलाक़े को भुट्टो परिवार का सत्ता केंद्र भी माना जाता है. इस्लामाबाद में बीबीसी संवाददाता बारबरा प्लैट का कहना है कि इस बात की पूरी संभावना है कि बेनज़ीर भुट्टो लरकाना इलाक़े में कोई रैली ज़रूर करेंगी लेकिीन 18 अक्तूबर को बम धमाकों के बाद अभी यह तय नहीं है कि वह जनसभा कब होगी. बेनज़ीर भुट्टो ने उस भीषण हमले के बावजूद पाकिस्तान में ही रहने का इरादा जताया है और आगामी आम चुनावों के लिए प्रचार करने का भी संकल्प ज़ाहिर किया है. आठ साल के बाद निर्वासित जीवन से वापस लौटीं बेनज़ीर अब एक बार फिर पाकिस्तान की राजनीति में अपने पैर जमा रही हैं. बेनज़ीर पर पिछले दिनों हुए हमले की जांच अभी भी चल रही है लेकिन अभी तक हमलावरों के बारे में कोई बड़ा सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा है. 1999 में जब जनरल परवेज़ मुशर्रफ़ ने तख्तापलट किया था उस समय बेनज़ीर देश से बाहर थीं और वह तब से वापस नहीं आईं थीं. अब जब वो क़रीब आठ साल के बाद वापस आई हैं तो ऐसी ख़बरें मिलीं कि उन्होंने राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ एक समझौता कर लिया है हालाँकि अभी ये साफ़ नहीं है कि ये समझौता किस तरह का है. | इससे जुड़ी ख़बरें बेनज़ीर भुट्टो के काफ़िले पर हमला19 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस कराची के अस्पतालों में दर्दनाक मंज़र19 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस धमाके बने पाकिस्तानी अख़बारों की सुर्खियाँ19 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस देर रात हुआ हमला मुख्य पृष्ठों पर छाया19 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस विस्फोट के मुख्य जाँचकर्ता को हटाया24 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस धमाके की जाँच के लिए नए अधिकारी25 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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