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कराची के अस्पतालों में दर्दनाक मंज़र | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कराची में हुए धमाकों के बाद शहर में जश्न का माहौल मातम में बदल गया और अस्पतालों में हर तरफ़ दर्दनाक मंज़र था. कुछ मिनटों के अंतराल पर गुरुवार रात हुए दो धमाकों में 130 लोगों की मृत्यु हो गई और 300 से अधिक घायल हो गए. धमाके के तुरंत बाद कराची के सभी अस्पतालों में आपातकाल लागू कर दिया गया. रक्तदान की अपील जिन्ना अस्पताल, सिविल अस्पताल, लियाकत नेशनल अस्पताल और अब्बासी सईद अस्पताल में मृतकों की लाशें और घायल को लाने का सिलसिला शुरू हो गया था. हर एम्बुलेंस के साथ भारी संख्या में लोगों का हुजूम भी पहुँच रहा था और घायलों की संख्या इतनी अधिक थी कि अस्पतालों में ख़ून की कमी हो गई. लोगों से रक्तदान करने की अपील की गई. डॉक्टरों के अनुसार ज़्यादातर घायलों को शरीर के ऊपरी हिस्से में चोटें आई हैं. कई लोग लापता धमाकों के बाद लोग अपने रिश्तेदारों की तलाश में रात भर अस्पतालों और मुर्दा घरों के चक्कर काटते रहे. लोग शवों से कफ़न उठाते वक़्त बस यही दुआ कर रहे थे कि मृतक व्यक्ति कहीं उनका परिजन न हो. जब कोई भी व्यक्ति अपने रिश्तेदार-दोस्त की पहचान कर लेता तो मानो सब्र का बाँध टूट जाता और कई लोग घंटों आँसू बहाते रहे. यही नहीं धमाके के बाद से कुछ लोग लापता भी हैं और उनके परिजन उन्हें ढूंढ रहे हैं. जिन्ना अस्पताल में मौजूद मोहम्मद शाहिद के पिता ने बताया कि उनके बेटे के बारे में धमाकों के बाद से ही कुछ पता नहीं चला है. उन्होंने बताया कि बेटे के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए एक रिश्तेदार को उन्होंने लियाकत अस्पताल और दूसरे के सिविल अस्पताल भेजा. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता रात भर अस्पतालों में घूम-घूम कर कार्यक्रताओं को तसल्ली देते रहे. | इससे जुड़ी ख़बरें 'तालेबान नहीं, सरकार के लोग ज़िम्मेदार'19 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस हमले की कई देशों ने कड़ी निंदा की19 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बाल-बाल बचीं बेनज़ीर, सुरक्षा कड़ी18 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था18 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बेनज़ीर का राजनीतिक सफ़र 02 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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