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ट्रक चालकों को एड्स से बचाने की मुहिम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में ट्रक चालकों में एचआईवी संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. इसकी रोकथाम के लिए भारतीय परिवहन निगम ‘कवच’ परियोजना चला रहा है. पत्नी और परिवार से दूर रहने वाले ट्रक चालक और क्लीनर की ज़िंदगी सूनी, उबाऊ और थकाने वाली होती है. कई अध्ययनों से पता चला है कि ये असुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं जिससे एचआईवी संक्रमण का ख़तरा बढ़ता है. कवच योजना का केंद्रबिंदु ट्रकवाले हैं. एक आँकड़े के अनुसार भारत में 66 हज़ार किलोमीटर लंबे राजमार्गों पर एक समय में लगभग 20 लाख ट्रक चालक और उनके सहायक वाहन होते हैं. यौनकर्मियों के ग्राहकों में इनकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत है. इनमें से दो से 11 फ़ीसदी एचआईवी पॉजिटिव है और दस से 15 फ़ीसदी यौन संबंधी रोगों से पीड़ित हैं. कवच इस परियोजना के तीन भाग हैं, सूचना पहुँचाना, चिकित्सा की व्यवस्था और कंडोम उपलब्ध कराना. परियोजना के निदेशक तरुण विज कहते हैं, “अब तक के अनुभव से हमें पता चला हैं कि ये ट्रकवाले इस बात से ऊब चुके हैं कि कोई बाहरी आदमी या कार्यकर्ता उनसे एड्स या यौन संबंधी जानकारी या समस्या के बारे में चर्चा करे."
कवच के तहत लगभग 350 से ज़्यादा ड्राइवर और खलासियों को प्रशिक्षित किया गया है ताकि वो अपने साथियों के साथ उनकी और अपनी ज़िंदगी की तमाम ज़रुरी बातों जैसे सड़क सुरक्षा, रोज़मर्रा की परेशानियों और यौन विषयों पर चर्चा कर सकें. प्रशिक्षित चालक और क्लीनर खाली समय में अपने साथियों के बीच परिचर्चा करते हैं जिसमें यौन संबंधों पर खुलकर बातचीत होती है जो मौजूद भीड़ का ध्यान मुद्दे की ओर लाने में काफ़ी कारगर साबित होती है. ऐसे ही एक क्लीनर पुष्पेंद्र कहते हैं, “इस बातचीत से हमने ये सीखा है कि अव्वल तो वेशायाओं के पास मत जाओ और अगर जाना ही हो तो कांडोम का ख़याल ज़रुर रखो. जोश में आदमी को होश नहीं खोना चाहिए.” कारगर रणनीति अमर सिंह एक ऐसे ही ट्रक चालक हैं जो खाली समय में अपने साथियों को एचआईवी-एड्स के बारे में जानकारी देते हैं.
वो कहते हैं, “ट्रक वाले अपने स्वास्थ्य के बारे में बात करने से हिचकता है लेकिन एक साथी से बात करने में वो हिचक ख़त्म हो जाती है. इसी को मद्देनज़र रखकर हम जैसे लोगों को इस परियोजना में शामिल किया गया है.” तरुण विज कहते हैं कि ट्रक चालक अपने ट्रक की देखभाल बेहद सावधानी पूर्वक करते हैं और कवच के तहत हम उन तक यही संवाद पहुँचाना चाहते हैं कि वो अपने शरीर की देखभाल भी उतनी ही सावधानीपूर्वक करें. परियोजना के तहत देश के चारों कोनों को जोड़ने वाले राजमार्गों पर बसे 17 ट्रांसपोर्ट नगरों में 17 चिकित्सालय हैं जिन्हें ‘खुशी क्लिनिक’ के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा 70 चिकित्सालय हैं जहाँ ये लोग न सिर्फ़ अपनी यौन संबंधी बीमारी के लिए बल्कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए जा सकते हैं. इन चिकित्सालयों की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है काउंसलिंग यानी सलाह की. यहाँ आने वाले हर ट्रक चालक और क्लीनर को इस बात की सलाह दी जाती है कि वो अपना एचआईवी टेस्ट ज़रुर करवाए. इसके अलावा इस परियोजना के तहत पान की दुकान, ढाबा, पेट्रोल पंप जैसी जगहों पर कंडोम उपलब्ध कराए जा रहे हैं. कवच के तहत पिछले सा़ढ़े तीन सालों में लगभग 20 लाख से ज़्यादा ट्रक चालकों और उनके सहायकों तक पहुँच बनाई गई है. |
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