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बिहार, यूपी में एड्स को लेकर चेतावनी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में एड्स की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रम नैको की अध्यक्ष सुजाता राव ने चेतावनी दी है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में एड्स महामारी का रूप ले सकता है. राव ने कहा कि राज्य सरकारों को एड्स की रोकथाम के लिए क़दम उठाने होंगे. बीबीसी से बातचीत में सुजाता राव ने कहा कि हाल ही में कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार बिहार के दो और उत्तर प्रदेश के चार ज़िलों में बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएँ एड्स की शिकार हैं. बिहार के दो ज़िले हैं लखीसराय और सहरसा जबकि उत्तर प्रदेश के ज़िलों के नाम अभी नहीं बताए गए हैं. सर्वेक्षण इन ज़िलों में सर्वेक्षण में यह पाया गया कि दस में से एक गर्भवती महिला को एचआईवी संक्रमण है. सुजाता राव ने कहा, "एड्स महामारी रोकने के लिए राज्य सरकारों को कड़े क़दम उठाने होंगे." नैको अध्यक्ष ने कहा कि जून में इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी. उन्होंने कहा कि इस बार उत्तर प्रदेश और बिहार में व्यापक सर्वे कराए गए थे. उनका मानना है कि इन दोनों राज्यों की सरकारें इस विषय को गंभीरता से नहीं ले रही हैं. राव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार में स्थिति उसी तरह है जैसे दस साल पहले एचआईवी की स्थिति आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में थी. दक्षिण भारतीय राज्यों और उत्तर प्रदेश-बिहार की ज़मीनी हक़ीकत में एक अहम अंतर ये है कि इन राज्यों में स्वास्थ्य सेवाएँ ख़स्ता हाल में हैं. महामारी बिहार में एड्स रोकथाम संस्थान के एक उच्च अधिकारी ने नैको अध्यक्ष के आकलन की पुष्टि करते हुए कहा कि बिहार इस समय महामारी की कगार पर खड़ा है. उनका कहना है कि राज्य के आठ प्रभावित ज़िलों में अब दो और ज़िले पूर्वी चंपारण और पश्चिमी चंपारण शामिल हो गए हैं. बिहार में एचआईवी से प्रभावित लोगों की संख्या 2005-07 में 2786 से बढ़कर 2006-07 में 4254 हो गई है.
राज्य के अधिकारियों का कहना है कि बिहार में एड्स प्रभावितों की संख्या बढ़ने की मुख्य वजह ये है कि हज़ारों की तादाद में यहाँ के पुरुष रोज़गार के लिए गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब जाते हैं. जब वो अपने घर लौटते हैं तो एड्स की बीमारी फैलती है. बिहार एड्स नियंत्रण प्राधिकरण के विशाल सिंह का कहना है कि राज्य में बढ़ती एड्स की समस्या को काबू में लाने के लिए यह ज़रूरी है कि गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब की सरकारें अन्य प्रदेशों से वहाँ आए श्रमिकों में एड्स के प्रति जागरूकता पैदा करें. उत्तर प्रदेश एड्स नियंत्रण प्राधिकरण के डॉ आरपी माथुर भी दूसरे राज्यों में गए प्रदेश के श्रमिकों को एड्स फैलाने का ज़िम्मेदार ठहराते हैं. उन्होंने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में बेरोज़गारी और अशिक्षा के चलते एड्स तेज़ी से फैल रहा है. डॉक्टर माथुर ने कहा कि पिछले वर्षों में यह पाया गया है कि राज्य में एड्स के 60 फ़ीसदी मामले पूर्वी उत्तर प्रदेश से आए हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत में बढ़ा एड्स का ख़तरा21 नवंबर, 2005 | विज्ञान सेलेनियम से एचआईवी का मुक़ाबला07 मई, 2007 | विज्ञान ख़तना से एड्स का ख़तरा '50 प्रतिशत कम'13 दिसंबर, 2006 | विज्ञान एचआईवी-एड्स और मलेरिया में संबंध08 दिसंबर, 2006 | विज्ञान एचआईवी के टीके के लिए 30 करोड़ डॉलर19 जुलाई, 2006 | विज्ञान एड्स के टीके का सफल परीक्षण20 अप्रैल, 2005 | विज्ञान | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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