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ख़तना से एड्स का ख़तरा '50 प्रतिशत कम' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एड्स से रोकथाम के लिए पुरुषों में ख़तना की उपयोगिता को लेकर हो रहे दो परीक्षणों को पूरा होने से पहले ही इसलिए रोक दिया गया है क्योंकि इनसे बहुत सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. ये परीक्षण कर रहे शोधकर्ताओं की मानें तो पुरषों में ख़तना एड्स होने के ख़तरे को 50 प्रतिशत तक कम कर देता है. ये परीक्षण कीनिया और युगांडा के आठ हज़ार लोगों पर किए जा रहे थे जिनसे पता चला कि ख़तना एड्स के वायरस से संक्रमण का ख़तरा कम कर देता है. हालांकि यह उन्हीं लोगों के संदर्भ में कहा गया है जो कि हैट्रोसेक्सुअल हैं यानी अपने से विपरीत लिंग के लोगों से ही यौन संपर्क बनाते हैं. इस बारे में जानकारी देते हुए बीबीसी के स्वास्थ्य संवाददाता ने बताया कि पुरुषों में ख़तना एड्स को रोकने के लिए इसलिए कारगर है क्योंकि ऐसा किए जाने पर लिंग के ऊपर की अतिरिक्त त्वचा को हटा दिया जाता है. क्यों कारगर है ख़तना दरअसल, त्वचा का यह अतिरिक्त हिस्सा एड्स के वायरस के फैलने की दृष्टि से काफी संवेदनशील है क्योंकि इस वायरस के फैलने का ज़्यादा ख़तरा इसी हिस्से की त्वचा की कोशिकाओं में होता है. त्वचा के इस हिस्से के हटाए जाने पर यह ख़तरा 50 प्रतिशत तक कम हो जाता है. हालांकि यह एड्स से बचने के लिए पूरी तरह से कारगर उपाय नहीं हो सकता क्योंकि 50 प्रतिशत ख़तरा ख़तना होने के बाद भी बना रहता है. इसी बारे में टिप्पणी करते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कहा गया है कि ख़तना एड्स और एचआईवी से बचने के बाक़ी तरीकों का विकल्प नहीं है. यानी एचआईवी के संक्रमण से बचने के लिए कंडोम जैसे रोकथाम के उपायों का इस्तेमाल करते रहना पड़ेगा. | इससे जुड़ी ख़बरें ख़तना से एड्स पर अंकुश13 अगस्त, 2006 | पहला पन्ना महिलाओं में ख़तना की प्रथा की निंदा02 जून, 2006 | पहला पन्ना ख़तना एड्स से बचाव करती है26 जुलाई, 2005 | विज्ञान नाई के ज़िम्मे कितने काम?15 जून, 2004 | भारत और पड़ोस ख़तने से एचआईवी का ख़तरा कम26 मार्च, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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