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एचआईवी पॉज़िटिव लोगों के लिए बीमा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के क़रीब 27 लाख एचआईवी पॉज़िटिव लोगों के लिए पहली बार एक कंपनी ने स्वास्थ्य बीमा योजना शुरू की है. चेन्नई की बीमा कंपनी 'स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस' की तरफ़ से शुरू की गई इस योजना के तहत एचआईवी के साथ जी रहे लोगों को 3000 रुपए सालाना का 'प्रीमियम' अदा करने के बाद, एड्स होने की स्थिति में 50 हज़ार रुपए मिलेंगे. इस समय कोई भी सरकारी या निजी बीमा कंपनी किसी एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति का स्वास्थ्य बीमा नहीं करती. इस नई योजना पर भारत में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम का काम देख रहे संगठन राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नैको) की अध्यक्ष सुजाता राव ने अपनी संतुष्टि जताते हुए कहा कि इस योजना को कार्यान्वित करने के पहले कुछ बिंदुओं पर चर्चा करनी होगी. सुजाता राव का मानना है कि कई एचआईवी पॉज़िटिव लोग सालाना 3000 रुपए देने की स्थिति में नहीं हैं. राव की राय से सहमत एचआईवी पॉज़िटिव 33 वर्षीय प्रदीप दत्ता कहते हैं कि सात साल पहले उन्हें एचआईवी पॉज़िटिव पाया गया और उसके बाद कोई भी बैंक उन्हें ऋण देने को तैयार नहीं था. प्रदीप दत्ता ने कहा, "इस बीमा योजना से हम जैसे लोगों को बहुत मदद मिलेगी लेकिन हर साल 3000 रुपए देने की हैसियत मेरी नहीं है." दत्ता का कहना है कि एचआईवी पॉज़िटिव होने की जानकारी मिलने पर उनके परिवार ने सारा संसाधन उनके इलाज़ में लगा दिया और अब उनके पास बिल्कुल भी पैसा नहीं बचा है. स्वयंसेवी संगठनों की भूमिका एचआईवी पॉज़िटिव लोगों की माली हालत को ध्यान में रखते हुए स्टार हेल्थ के अध्यक्ष वी जगन्नाथन ने कहा कि अगर स्वयंसेवी संगठन आगे आते हैं तो उनकी कंपनी अपनी ओर से इस कार्यक्रम में और अधिक धन लगा सकती है. कंपनी का कहना है कि स्वयंसेवी संगठनों की मदद से एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति की तरफ़ से अदा किए दाने वाले 'प्रीमियम' को कम किया जा सकता है. इस कार्यक्रम को लागू करने के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने पहल की है. आंध्र प्रदेश एड्स सोसाइटी के डॉक्टर अशोक कुमार का कहना है कि राज्य सरकार इस कार्यक्रम को अपने बल पर नहीं चला सकती. इसलिए आंध्र प्रदेश ने राज्य के एचआईवी पॉज़िटिव लोगों के संगठन ‘नेटवर्क ऑफ़ पॉज़िटिव पीपुल’ से कहा है कि वो इस निजी बीमा कंपनी के साथ मिलकर ग़रीब एचआईवी पॉज़िटिव लोगों के लिए एक कार्यक्रम बनाए. स्टार हेल्थ के अध्यक्ष ने बीबीसी से कहा कि वो इस योजना को ज़रूरत के हिसाब से बदलने के लिए तैयार हैं क्योंकि उनका मकसद इस कार्यक्रम से मुनाफ़ा कमाना नहीं है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'एचआईवी मामले अनुमान से कम'13 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भारत की सस्ती दवाओं को क़ानूनी चुनौती15 फ़रवरी, 2007 | भारत और पड़ोस ढके-छिपे यौन संबंध कितने ज़िम्मेदार हैं?19 अप्रैल, 2007 | भारत और पड़ोस कंडोम बार चला रही है सरकार03 मई, 2007 | भारत और पड़ोस बिहार, यूपी में एड्स को लेकर चेतावनी30 मई, 2007 | भारत और पड़ोस भारत में एड्स पीड़ितों की संख्या पर संदेह08 जून, 2007 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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