|
ढके-छिपे यौन संबंध कितने ज़िम्मेदार हैं? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व में किसी भी और देश से ज़्यादा एचआईवी ग्रस्त लोग भारत में रहते हैं. लेकिन कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक समाज में सेक्स से जुड़े विभिन्न पहलुओं को स्वीकार नहीं किया जाता तब तक एड्स की रोकथाम की दिशा में प्रगति नहीं होगी. मिसाल के तौर पर गुजरात में रहने वाली गीता और उनके पति विजय का मामला लीजिए. उनसे हमारी मुलाक़ात वडोदरा में हुई. शादी के बाद से ही विजय का अन्य पुरुषों के साथ यौन संबंध रहा है. शुरू में विजय ने इस बात को अपनी पत्नी से छिपाया लेकिन एक दिन गीता ने उन्हें एक पुरुष का चुंबन लेते हुए देख लिया. गीता कहती हैं," पहले काफ़ी हैरानी हुई क्योंकि मुझे इस बारे में कुछ भी पता नहीं था. लेकिन फिर मुझे लगा कि समलैंगिकता कुछ लोगों में बड़ी प्राकृतिक चीज़ है, अब मुझे कोई दिक़्क़त नहीं है." अपनी वैवाहिक ज़िंदगी के बारे में गीता बताती हैं, "बाक़ी लोगों की तरह ही मैं और मेरे पति सामान्य तरीके से पारिवारिक ज़िंदगी व्यतीत करते हैं, हालांकि मेरे पति के ब्वायफ़्रेंड या पुरुष मित्र हैं." 'समलैंगिक होने से दिक्कत नहीं' गीत का कहना है कि वे और उनके पति विजय एक दूसरे का ध्यान रखते हैं और इसी कारण उन्हें विजय के समलैंगिक होने से कोई दिक्कत नहीं है. गीता कहती हैं कि अब उन्हें अपने पति से किसी तरह की असुरक्षा की भावना नहीं होती. वे कहती हैं, "ये बेहतर है कि मेरे पति के पुरुषों से संबंध हैं न कि महिलाओं से. ऐसे परिवारों के बारे में अकसर सुनने को मिलता है जो टूट गए है. अगर मेरे पति का किसी महिला से संबंध होगा तो मुझे डर रहेगा कि वो मुझे और मेरे बच्चों को छोड़कर चले जाएँगे."
वडोदरा में रहने वाले विजय और गीता किसी भी अन्य कामकाजी दंपत्ति की तरह हैं जो एक छोटे से घर में रहते हैं. वडोदरा मुंबई की तरह कोई बड़ा शहर नहीं है जहाँ समलैंगिकता के मामले ज़्यादा नज़र आते हैं. समलैंगिक राजकुमार वडोदरा का एक ग़ैर सरकारी संगठन 'लक्ष्य' पुरुष समलैंगिकों में एड्स की रोकथाम के लिए काम करता है. इस संगठन के संस्थापकों में से एक मानवेंद्र सिंह गोहिल ने ही हमारा परिचय गीता और विजय से करवाया. मानवेंद्र राजपिपला के महाराजा के बेटे हैं. पिछले वर्ष उन्होंने सार्वजनिक रुप से ये बताकर सनसनी फैला दी थी कि वे समलैंगिक हैं. अब वे अपने आप को समलैंगिक कार्यकर्ता बताते हैं. मानवेंद्र सिंह गोहिल कहते हैं, "मुझे लगता है कि जिन समलैंगिक पुरुषों से हम संपर्क करते हैं उनमें से 75 फ़ीसदी शादीशुदा हैं. इसलिए एचआईवी की रोकथाम के लिए हमने पत्नियों तक पहुँचने का फ़ैसला किया." दुनिया भर में करीब 57 लाख लोग एचआईवी ग्रस्त हैं और भारत में ये मामले सबसे ज़्यादा हैं. पतियों से संक्रमित होने का ख़तरा पत्नियों में बहुत ज़्यादा रहता है. लेकिन गीता को भरोसा है कि वे और उनके पति विजय स्वस्थ रहेंगे. वे कहती हैं, " मैं एचआईवी के फैलने से चिंतित हूँ. लेकिन अगर मेरे पति अन्य पुरुषों के साथ सुरक्षित यौन संबंध बनाते हैं और कॉन्डोम इस्तेमाल करते हैं तो इससे मुझ पर असर नहीं पड़ेगा." ग़ैर सरकारी संगठन 'लक्ष्य' के ज़रिए ही गीता और विजय सुरक्षित यौन संबंध के बारे में जागरुक हुए. इसके अलावा कॉंन्डोम बेचने वाले कई लोग भी लक्ष्य के माध्यम से ही सुरक्षित यौन संबंध के बारे में जागरुक हुए हैं. सुरक्षित यौन संबंध
महिलाओं तक एचआईवी की रोकथाम का संदेश पहुँचाने के लिए संगठन ने महिला कर्मचारियों को भी रखा हुआ है. लक्ष्य की महिला कर्मचारी हंसा हमें वडोदरा के एक ग़रीब रिहाइशी इलाक़े महकपुरा में ले गईं. महकपुरा में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग रहते हैं. हंसा कहती हैं," मैं महिलाओं से अलग से बात करती हूँ क्योंकि यहाँ समाज में इस तरह की बातें सार्वजनिक तौर पर नहीं की जातीं. मैं इन्हें बताती हूँ कि मेरा काम क्या है और फिर धीरे से एचआईवी और यौन संबंध से फैलने वाली बीमारियों के बारे में बताती हूँ." हंसा का कहना है कि कॉन्डोम इस्तेमाल करने के लिए अपने पतियों को राज़ी करवा पाना इन महिलओं के लिए मुश्किल होता है. हंसा कहती हैं कि वे बड़ी संख्या में कॉन्डोम इलाक़े में जमा रखती हैं ताकि महिलाएँ आसानी से इन्हें ले जा सकें. महकपुरा के दौरे के दौरान लोगों ने हंसा का स्वागत किया और अभिनंदन किया. ज़ाहिर है लोग उनपर भरोसा करते हैं. झुग्गियों और छोटी-छोटी दुकानों वाले इस इलाक़े में हंसा ने करीब 300 महिलाओं से संपर्क किया है. उनका अनुमान है कि इनमें से करीब 250 महिलाओं के पति समलैंगिक हैं. कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि भारत में एड्स के ख़िलाफ़ लड़ाई में यौन संबंधों की इसी तस्वीर को स्वीकार करना बेहद अहम है. |
इससे जुड़ी ख़बरें अमरीकी चर्च समलैंगिकता पर बँटे17 दिसंबर, 2006 | पहला पन्ना 'एड्स फैल रहा है और संसाधन हैं कम' 30 नवंबर, 2006 | पहला पन्ना 'एड्स से हर मिनट एक बच्चे की मौत'25 अक्तूबर, 2005 | पहला पन्ना समलैंगिक दंपत्तियों के अधिकार समान25 अगस्त, 2005 | पहला पन्ना कनाडा में वैध होंगे समलैंगिक विवाह29 जून, 2005 | पहला पन्ना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||