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ग्राहक बता रहे हैं एड्स से बचने के उपाय | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक कहावत है कि लोहा ही लोहे को काटता है. कोलकाता के रेडलाइट इलाक़े सोनागाछी में वेश्याओं के हितों की लड़ाई लड़ने वाली संस्था 'दुर्बार महिला समन्वय समिति' ने शायद इसी कहावत पर भरोसा रखते हुए एक अनोखी पहल की है. उसने एशिया में वेश्याओं के इस सबसे बड़े घर में एचआईवी और एड्स जैसी जानलेवा बीमारियों का प्रसार रोकने के लिए कुछ ख़ास लोगों की सहायता ली है. और ये लोग हैं इस वेश्यालय के स्थाई ग्राहक. इसके लिए स्थाई ग्राहकों का एक संगठन ‘साथी' भी बनाया गया है. ‘साथी' के ये लोग अब इस वेश्यालय में जिस्म का धंधा करने वाली वेश्याओं और यहां आने वाले नए ग्राहकों को सुरक्षित सेक्स का पाठ पढ़ाते हैं. पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के उत्तरी इलाके में स्थित सोनागाछी में लगभग 10 हज़ार वेश्याएँ रहती हैं. लेकिन ‘दुर्बार’ और उसके सहयोगी संगठन ‘साथी’ की कोशिश है कि यहाँ आने वाला हर कोई 'ख़तरों' से पहले से ही परिचित रहे. प्रशिक्षण वैसे, यहाँ आने वाले ज़्यादातर ग्राहक एड्स या सुरक्षित सेक्स के बारे में अनभिज्ञ हैं, लेकिन 'साथी' ने ऐसे लगभग दो सौ नियमित ग्राहकों की एक सूची बनाई है जो यहां आने वाले ग्राहकों को कंडोम के इस्तेमाल और नियमित तौर पर ख़ून की जाँच के बारे में बताते हैं. इस वेश्यालय में नियमित तौर पर आने वाले सुनील मुखर्जी कहते हैं, "हम सोनागाछी में ही अपना ज्यादातर समय बिताते हैं. इसलिए यहां आने वाले नए ग्राहकों को संक्रामक बीमारियों के प्रति आगाह करना हमारा कर्त्तव्य है." वे कहते हैं, "शरीर की भूख मिटाने के लिए यहां आने वाले ज़्यादातर लोग कंडोम का इस्तेमाल करने से मना कर देते हैं और यहीं से हमारा काम शुरू होता है." मुखर्जी व उनके दोस्त रोजाना शाम को वेश्यालय का दौरा करते हैं ताकि ग्राहकों व वेश्याओं को सुरक्षित सेक्स के तरीकों की जानकारी देकर उनको भी एड्स जागरूकता अभियान में शामिल किया जा सके. बदलती स्थितियाँ मुखर्जी कहते हैं, "कुछ ग्राहक तो उनकी बात सुनने के लिए तैयार ही नहीं होते. लेकिन ज़्यादातर लोग न सिर्फ़ उनकी बातों को ध्यान से सुनते हैं बल्कि सुरक्षित सेक्स के तरीक़ों की जानकारी देने वाला परचा भी ले लेते हैं."
दुर्बार महिला समन्वय समिति का दावा है कि इस साल की शुरूआत में शुरू की गई इस परियोजना के तहत अब तक पाँच हजार से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित सेक्स के तरीकों से अवगत कराया जा चुका है. समिति की परियोजना निदेशक भारती डे, जो खुद भी देह व्यापार में रह चुकी हैं, कहती हैं, "हमने इस परियोजना के तहत अब तक जितने लोगों को सलाह दी है उनमें से 80 फीसदी ग्राहक व वेश्याएँ अब कंडोम का इस्तेमाल करती हैं. लेकिन अब भी इस मामले में बहुत कुछ किया जाना है." सामाजिक कार्यकर्ता कहते हैं, सोनागाछी आने वाले 90 फीसदी लोगों को अब तक इस बात की जानकारी नहीं है कि यौन संबंधों के ज़रिए भी एड्स हो सकता है. कार्यकर्ता कहते हैं कि यौनजनित बीमारियों की जानकारी देने से फ़ायदा हो रहा है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अधिकारी व राज्य के पूर्व स्वास्थ्य निदेशक प्रभाकर चटर्जी कहते हैं, "देश में एड्स के बढ़ते प्रकोप को ध्यान में रखते हुए शुरू की गई इस परियोजना के बेहतर नतीजे सामने आ रहे हैं और यही वक़्त की ज़रूरत है." सोनागाछी इलाक़े में रोज़ाना हज़ारों नए ग्राहक आते हैं. |
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