| हक़ के लिए बार बालाएँ कोलकाता पहुँचीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
‘हम बार बालाएं हैं,वहीं रहने दीजिए. हमें वेश्या मत बनाइए.’ इसी अपील के साथ अपने पेशे के हक़ में आम लोगों का समर्थन जुटाने के लिए मुंबई की बार बालाओं ने देशव्यापी अभियान शुरू किया है. इस अभियान का पहला पड़ाव था कोलकाता. यहां एशिया के सबसे बड़े रेडलाइट इलाके सोनागाछी की हज़ारों यौनकर्मियों ने उनके समर्थन में एक रैली आयोजित की. उन्होंने अपने हाथों में बैनर व तख्तियां ले रखी थीं. साथ ही डांस बारों को बंद करने की महाराष्ट्र सरकार के फैसले के खिलाफ नारेबाज़ी भी की. मुंबई के बाहर बार डांसरों के समर्थन में यह अपने किस्म की पहली रैली थी. मुंबई से अंजलि सिंह व रेखा चौहान नामक दो बार डांसरों के साथ यहाँ आईं महाराष्ट्र बार गर्ल्स यूनियन की अध्यक्ष वर्षा काले कहती हैं कि महाराष्ट्र सरकार के फैसले से 55 हजार लड़कियां एक ही रात में बेरोज़गार हो गई हैं. वर्षा काले कहती हैं,"हम वेश्या नहीं बनना चाहतीं. लेकिन हमारे सामने कोई और विकल्प नहीं है. कुछ युवतियों ने तो वेश्यावृत्ति शुरू कर दी है क्योंकि उनके सामने अपने घरवालों का पेट पालने का दूसरा कोई रास्ता नहीं था. काले कहती हैं कि हममें से ज़्यादातर का परिवार हमारे पेशे से ही चलता था. ज़्यादातर डांसर पढ़ी-लिखी भी नहीं है. राज्य सरकार ने डांस बारों को तो बंद कर दिया है.लेकिन बार बालाओं के पुनर्वास की कोई योजना नहीं बनाई है. बंगाल की लड़कियाँ
मुंबई की बार बालाओं में लगभग 15 हजार युवतियाँ पश्चिम बंगाल की हैं. काले ने रैली में कहा कि अगर यह युवतियां बेरोज़गार होकर यहाँ लौटीं तो राज्य सरकार को उनके पुनर्वास की कोई व्यवस्था करनी चाहिए. मुंबई में एक बार में डांस करने वाली अंजलि सिंह दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके की रहने वाली है. दो साल पहले उसने ठाणे के एक बार में डांस करना शुरू किया था. लेकिन अब वह बेरोजगार है. इसलिए उन्होंने कई अन्य युवतियों के साथ मिल कर देश भर का दौरा करने का फैसला किया है. अंजलि कहती हैं,"अगर डांस बारों पर पाबंदी जारी रही तो हमें देह व्यापार का पेशा अपनाना पड़ेगा. घरवालों को भूखा तो नहीं मार सकते न?" महाश्वेता देवी यह प्रतिनिधिमंडल यहां जानी-मानी लेखिका व आदिवासियों के हक के लिए लड़ने वाली महाश्वेता देवी से भी मिलेगा. काले कहती हैं,"महाश्वेता देवी आदिवासियों के हक़ के लिए लड़ती रही हैं. बार बालाओं में भी बेड़िया, गंधर्व व धनावत आदिवासियों की तादाद ज्यादा है." कोलकाता में रैली का आयोजन वेश्याओं के हितों की रक्षा के लिए बनी दुर्बार महिला समन्वय समिति की ओर से किया गया था. समिति की सदस्य महाश्वेता चटर्जी ने कहा,"हम इन युवतियों को अपने नारकीय पेशे में नहीं आने देंगे. सरकार को डांस बारों पर पाबंदी लगाने के पहले इन युवतियों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी होगी." अब बार डांसरों का यह प्रतिनिधिमंडल पश्चिम बंगाल के बाद आंध्र प्रदेश व कर्नाटक जाएगा. |
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