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डांस बार पर प्रतिबंध संबंधी क़ानून जल्द | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
महाराष्ट्र विधानसभा में छह घंटे चली बहस के बाद बुधवार को डांस बार पर प्रतिबंध संबंधी विधेयक सर्वसम्मति से पारित हो गया. विधानपरिषद में पारित होने के बाद यह विधेयक क़ानून बन जाएगा. इस क़ानून से महाराष्ट्र के डांस बार में काम करनेवाली हज़ारों डांस गर्ल्स प्रभावित होंगी. इस विधेयक में मुख्य भूमिका निभानेवाले उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल ने कहा,'' हम राज्य में नग्न डांस की अनुमति नहीं देंगे.'' उनका मानना है कि ये 'अपराध और वेश्यावृत्ति' के अड्डे हैं और इनसे युवा वर्ग प्रभावित हो रहा है. इसके पहले राज्यपाल एसके कृष्णा ने डांस बार बंद करने संबंधी विधेयक पर दस्तख़त करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि राज्य विधानसभा में इस पर बहस कराई जाए. विवाद महाराष्ट्र सरकार ने पहले मुंबई के बाहर के सभी डांस बार पर पाबंदी लगाई थी और फिर मुंबई के सभी डांस बार के लाइसेंस रद्द कर दिए थे. मुंबई में डांस बार चलाना ग़ैर जमानती अपराध हो गया था और इसका उल्लंघन करनेवाले को तीन साल तक की सज़ा सुनाई जा सकती थी. सरकार का तर्क है कि इन डांस बारों में लोग लड़कियों का नाच देखने आते हैं और लुकेछिपे तौर पर ये वेश्यावृत्ति के ठिकाने बन गए हैं. सिर्फ़ मुंबई में ही पाँच सौ से अधिक डांस बार हैं जहाँ लगभग साठ हज़ार लड़कियाँ हिंदी फ़िल्मी गानों पर थिरकती है और लोग बियर की चुस्कियाँ लेते हैं. लगभग छह महीने पहले मुंबई की पुलिस ने कई ऐसे बार पर छापे मारे थे जिसके विरोध में इनमें काम करने वाली लड़कियों ने जुलूस निकाले थे. |
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