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शनिवार, 27 अक्तूबर, 2007 को 16:40 GMT तक के समाचार
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'आजतक' के ख़िलाफ़ वकील की रिपोर्ट
गुजरात दंगे
गुजरात दंगों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी
गुजरात में वर्ष 2002 के दौरान हुए सांप्रदायिक दंगों की जाँच करने वाले नानावती आयोग में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील अरविंद पंडया ने इस्तीफ़ा दे दिया है और साथ ही उन्होंने एक निजी टेलीविज़न चैनल के ख़िलाफ़ रिपोर्ट भी दर्ज कहाई है.

तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में अरविंद पंडया को भी कुछ कहते हुए दिखाया गया है. एक स्थानीय पत्रकार महेश लांगा ने बताया है कि पंडया ने अहमदाबाद में शनिवार को पत्रकार सम्मेलन बुलाकर कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया गया है.

उधर एक ग़ैरसरकारी संगठन सिटिज़ंस फॉर जस्टिस एंड पीस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाते हुए कहा है कि गोधरा ट्रेन घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों की जाँच में तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में उजागर हुई जानकारियों को भी संज्ञान में लिया जाए.

एजेंसियों के अनुसार अरविंद पंडया ने कहा है कि क़रीब छह महीने पहले उसके पास दो लोग आए थे जिन्होंने कहा था कि वे गोधरा और उसके बाद हुई हिंसा पर कोई टेलीविज़न कार्यक्रम बना रहे हैं, उन दो लोगों ने उन्हें एक पूर्व लिखित स्क्रिप्ट यानी आलेख दिया था और उन्होंने बस उस आलेख को पढ़ दिया था.

अरविंद पंडया का दावा है कि तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में बस उसी आलेख को दिखाया गया है.

जब पत्रकारों ने उनसे यह पूछा कि वे एक बड़े वकील हैं और इस तरह किसी टेलीविज़न कार्यक्रम के लिए आलेख पढ़ने के लिए कैसे तैयार हो गए तो उन्होंने आज तक के गुजरात ब्यूरो प्रमुख धीमंत पुरोहित का हवाला देते हुए कहा कि वह अनेक वर्षों से उनके मित्र हैं और पुरोहित ने ही कहा था कि जो लोग आलेख लेकर उनके पास आएंगे वे भरोसेमंद लोग हैं इसलिए उनके साथ सहयोग कर सकते हैं.

अरविंद पंडया ने आज तक टेलीविज़न चैनल के ख़िलाफ़ जो रिपोर्ट दर्ज कराई है उसमें धीमंत पुरोहित का भी नाम है. पंडया ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा, "आज तक चैनल और इसके गुजरात संवाददाता ने उनके साथ धोखाधड़ी की है और इसी वजह से उन्होंने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है."

अरविंद पंडया ने कहा, जिन दो लोगों ने उनसे आलेख के साथ संपर्क किया था उन्होंने उस आलेख पर मेरे दस्तख़त लिए थे लेकिन उसकी प्रति मुझे नहीं दी थी. पिछले क़रीब छह महीनों से मैं उस आलेख की प्रति हासिल करने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह नहीं मिली. और बाद में उन्होंने मेरे इंटरव्यू के कुछ हिस्से स्टिंग ऑपरेशन में दिखा दिए."

'रिकॉर्डिंग तलब हो'

ग़ैर सरकारी संगठन सिटिजंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस की सचिव तीस्ता सीतलवाड़ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके कहा है कि तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में जो सबूत सामने आए हैं वे जाँच के लिए तलब किए जाएँ.

तीस्ता सीतलवाड़
तीस्ता ने गुजरात दंगों के मुक़दमे राज्य से बाहर चलाने की याचिकाओं पर जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है

यह याचिका उस मामले में दर्ज की गई है जिसमें गुजरात दंगों के मुक़दमे राज्य से बाहर चलाए जाने के लिए दायर किए गए थे. इन मामलों में अनेक याचिकाएँ विचाराधीन हैं.

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने वर्ष 2003 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके माँग की थी कि दंगों से संबंधित तमाम बड़े मुक़दमे गुजरात से बाहर चलाए जाएँ जिनमें गोधरा रेल आगज़नी, गोलबर्ग नरसंहार, नरोदा गाँव और पटिया नरसंहार, सरदार पुरा और ओदे नरसंहार के मामले शामिल हैं जिन पर नवंबर 2003 के बाद से रोक लगी हुई है.

इस याचिका में कहा गया है कि जिन लोगों पर दंगों की साज़िश रचने और हत्या और बलात्कार के मामलों में बड़े पैमाने शामिल होने के आरोप हैं वे आज खुले घूम रहे हैं और उनसे दंगों के प्रभावितों और गवाहों को भारी ख़तरा है.

मानवाधिकार आयोग की उस याचिका के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन सभी मुक़दमों पर रोक लगा दी थी. ग़ैरसरकारी संगठन सिटिजंस फ़ॉर जस्टिस एंड पीस ने अब सुप्रीम कोर्ट में जो याचिका दायर की है उसमें कहा गया है कि मुक़दमे राज्य से बाहर चलाए जाने की याचिकाओं पर सुनवाई तेज़ की जाए और तहलका के स्टिंग ऑपरेशन में सामने आए सबूतों को भी संज्ञान में लिया जाए.

संगठन के अनुसार इन सबूतों में भारतीय जनता पार्टी का एक विधायक और शिव सेना के कार्यकर्ता अल्पसंख्यकों की हत्या करने की बात स्वीकार करते नज़र आते हैं.

संगठन ने यह भी माँग की है कि तहलका के पास इस स्टिंग ऑपरेशन की मूल रिकॉर्डिंग की सीडी तलब की जाएँ.

गुजरात सरकार ने ये मुक़दमे राज्य से बाहर चलाए जाने का विरोध किया है.

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