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शुक्रवार, 12 अक्तूबर, 2007 को 10:48 GMT तक के समाचार
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'जनता की राय सबसे महत्वपूर्ण'
नरेंद्र मोदी
नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि उनके कार्यकाल में गुजरात की तस्वीर बदल गई है
गुजरात के चर्चित मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2002 के दंगों पर खेद जताने के सवाल पर कहा है कि उनके लिए राज्य की जनता की राय सबसे महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि उसके बाद वे गुजरात की जनता के पास गए थे और अब फिर जाएँगे.

हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप सम्मेलन में बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि विकास उनका मूलमंत्र है और वे राज्य के प्रशासन और जनता को प्रेरित करते हुए राज्य को आगे ले जा रहे हैं.

उन्होंने अपने कार्यकाल में गुजरात में हुए विकास कार्यों की सूची गिनवाते हुए कहा कि उन्हीं अफ़सरों और उसी मशीनरी से उन्होंने राज्य की तस्वीर बदल दी है.

इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, "मैंने गुजरात के न्यायाधीशों से बात की और उन्हीं सुविधाओं के बीच शाम की अदालतें शुरु करवाईं और न्यायालय की छुट्टियों में कटौती की. इससे राज्य में मामले तेज़ी से निपट रहे हैं."

यह पूछे जाने पर कि क्या अब भाजपा-कांग्रेस सभी के लिए सिर्फ़ विकास एकमात्र मुद्दा है, उन्होंने कहा, "अगर गाँधी रामराज्य की बात करते थे तो मेरी राय में वह आज भी प्रासंगिक है. गाँधी के लिए रामराज्य कल्याणकारी राज्य था."

दंगों के सवाल पर जवाब
 न जाने कौन सी विकृतियाँ आपके भीतर घुस गई हैं कि आप चीज़ों को संपूर्णता में नहीं देख सकते
नरेंद्र मोदी

कार्यक्रम संचालित कर रहे पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने जब गुजरात में 2002 में हुए दंगों के हवाले से पूछा कि क्या गुजराज बदल गया है या नरेंद्र मोदी बदल गए हैं, तो नरेंद्र मोदी ने कहा, "जिन लोगों ने इस तरह की ओलचना की है उनके लिए सच को स्वीकार करना कठिन होगा, शायद पाँच साल और लगेगा, मैं इसके लिए इंतज़ार करुँगा."

जब प्रकारांतर से यह सवाल दोहराया गया तो गुजरात के मुख्यमंत्री ने पहले तो राजदीप सरदेसाई पर अपना एजेंडा थोपने का आरोप लगाया फिर कहा, "न जाने कौन सी विकृतियाँ आपके भीतर घुस गई हैं कि आप चीज़ों को संपूर्णता में नहीं देख सकते."

उनका कहना था कि उन्होंने विकास के जो कार्य किए हैं, उसे नहीं देखा जा रहा है.

उन्होंने अपने भाषण में कहा कि राज्य के विकास और देश के विकास को जोड़कर देखना होगा और राज्यों के बीच विकास के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाना होगा.

उन्होंने कहा कि कोई भी राज्य विकास में देश से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता और न देश को राज्यों के विकास को पहचान के संकट के रुप में नहीं देखना चाहिए.

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