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शनिवार, 15 अप्रैल, 2006 को 16:50 GMT तक के समाचार
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फ़ैसला प्रधानमंत्री करेंगे, मोदी नाराज़
मेधा पाटकर
मेधा पाटकर पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं. उन्होंने अस्पताल में भी भोजन करने से इंकार कर दिया है
नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध ऊंचाई और पुनर्वास मामलों की समीक्षा के लिए शनिवार को दिल्ली में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में कोई नतीजा नहीं निकला.

लेकिन बाँध की ऊँचाई रोकने के पक्ष में दिख रहे केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफ़ुद्दीन सोज़ ने अंतिम निर्णय प्रधानमंत्री पर छोड़ दिया है.

केंद्र सरकार के रुख़ से नाराज़ गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने नर्मदा बचाओ आंदोलन के दबाव में आने का आरोप लगाते हुए रविवार से 51 घंटे के उपवास की घोषणा की है.

उधर बाँध के समर्थक आंदोलनकारियों ने वडोदरा में नर्मदा बचाओ आंदोलन के कार्यालय में तोड़फ़ोड़ की है.

उल्लेखनीय है कि नर्मदा बचाओ आंदोलन सहित कई संस्थाएँ नर्मदा पर बन रहे सरदार सरोवर बाँध की ऊँचाई 110 मीटर से बढ़ाकर 122 मीटर करने का यह कहकर विरोध कर रही हैं कि पहले विस्थापित 35 हज़ार परिवारों का पुनर्वास किया जाना चाहिए.

इसी माँग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और अस्पताल में उनकी हालत गंभीर बताई जाती है.

मतभेद

शनिवार को नर्मदा बाँध समीक्षा समिति की बैठक बुलाई तो गई थी कोई हल निकालने के लिए लेकिन इसमें राज्यों के आपसी मतभेद ही उभरकर सामने आया.

बैठक में चार राज्यों गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान के मुख्यमंत्री, पर्यावरण मंत्री और समीक्षा समिति के सदस्यों ने हिस्सा लिया.

बैठक में राजनीतिक विभाजन साफ़ दिखा और भाजपा शासित राज्यों गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान ने एक सुर में कहा कि बाँध की ऊँचाई बढ़ाने से नहीं रोकना चाहिए.

जबकि कांग्रेस शासित राज्य महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के तहत पुनर्वास का कार्य पूरा हुए बिना ऊँचाई नहीं बढ़ाने दी जानी चाहिए.

 हम चाहते थे कि नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने बाँध की ऊंचाई बढ़ाने का जो आदेश दिया है, उसे फ़िलहाल स्थगित कर दिया जाए पर आज की बैठक में इसपर एक राय नहीं बन सकी इसलिए अब यह मामला प्रधानमंत्री के विचाराधीन है
प्रोफ़ेसर सैफ़ुद्दीन सोज़, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री सैफ़ुद्दीन सोज़ ने बैठक के बाद पत्रकारों से कहा, "हम चाहते थे कि नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण ने बाँध की ऊंचाई बढ़ाने का जो आदेश दिया है, उसे फिलहाल स्थगित कर दिया जाए पर बैठक में इसपर एक राय नहीं बन सकी इसलिए अब यह मामला प्रधानमंत्री के विचाराधीन है."

उन्होंने कहा कि केंद्रीय प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) का कोई भी व्यक्ति इस बाँध को बनाए जाने के ख़िलाफ़ नहीं है पर बाँध बनने से बेघर हुए लोगों के पुनर्वास पर सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्देश दिए हैं, उनका पालन हुआ है कि नहीं, इसकी पड़ताल होनी भी ज़रूरी है.

मोदी की भूख हड़ताल

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका विरोध कर रहे हैं और बैठक के बाद उन्होंने कहा कि वे भी रविवार से 51 घंटे की भूख हड़ताल करेंगे.

नरेंद्र मोदी
सरदार सरोवर बाँध से सबसे अधिक लाभ नरेंद्र मोदी के राज्य गुजरात को मिलने वाला है

नरेंद्र मोदी ने सरकार पर केंद्र आरोप लगाया कि वह नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर के दबाव में आ गई है और इसे गुजरात विरोधी, विकास विरोधी और नर्मदा विरोधी क़दम बताया.

गुजरात प्रदेश कांग्रेस ने भी केंद्रीय समिति की सिफ़ारिश का विरोध किया है और कहा है कि वह बाँध की ऊँचाई बढ़ाए जाने के समर्थन में रविवार को एक दिन का प्रदेश बंद रखेगी.

उधर सरदार सरोवर बाँध की ऊंचाई बढ़ाए जाने के विरोध में दिल्ली में अनशन पर बैठीं भगवती देवी ने इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, "हमें ग़लत बताने वाले नरेंद्र मोदी को मालूम होगा कि उन्होंने किस तरह का पुनर्वास करवाया है. हम तो पुनर्वास की बाट देख रहे हैं. पुनर्वास का सच क्या है, यह मौके पर जाकर पूरा देश देख सकता है."

ग़ौरतलब है कि मेधा पाटकर नर्मदा बाँध की ऊँचाई बढ़ाने के फ़ैसले का विरोध करते हुए पिछले 17 दिनों अनशन कर रही हैं.

दिलचस्प बात यह है कि गुजरात में सत्तापक्ष ही नहीं बल्कि विपक्षी दल कांग्रेस भी बाँध की ऊंचाई बढ़ाने का पुरज़ोर समर्थन कर रहा है और वहाँ इसे लेकर प्रदर्शन भी हो रहे हैं.

समीक्षा

इससे पहले केंद्र सरकार की ओर से इस मामले की समीक्षा के लिए एक समिति बनाई गई थी.

इस समीक्षा समिति ने छह अप्रैल को मध्य प्रदेश के बाँध प्रभावित इलाक़ों का जायज़ा लिया था और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी.

उधर नर्मदा बांध की ऊंचाई बढ़ाने का विरोध करते हुए दिल्ली के जंतर-मंतर इलाक़े में प्रदर्शन कर रहे हैं.

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अभी तक पुनर्वास नहीं हुआ है इसलिए सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश माना जाना चाहिए कि पर्याप्त पुनर्वास के बिना ऊँचाई न बढ़ाई जाए.

फ़िल्म अभिनेता आमिर ख़ान ने भी शुक्रवार को धरनास्थल का दौरा किया था और प्रदर्शनकारियों को अपना समर्थन जताया था. इससे पहले मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पिछले हफ्ते अस्पताल में भर्ती कराया गया है लेकिन उन्होंने अपना उपवास नहीं तोड़ा है.

सुप्रीम कोर्ट में 17 अप्रैल को फिर इस मामले पर अगली सुनवाई होने वाली है.

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