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मंगलवार, 04 अप्रैल, 2006 को 10:53 GMT तक के समाचार
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मेधा पाटकर की तबीयत बिगड़ी

मेधा पाटकर
मेधा के समर्थन में पूर्व प्रधानमंत्री वी पी सिंह भी आए थे
नर्मदा बचाओ आंदोलन से जुड़ी सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर लगातार सात दिन से भूख हड़ताल पर हैं और अब उनकी स्थिति काफ़ी बिगड़ गई है.

मेधा और उनके कई सहयोगी नर्मदा नदी पर बनाए जा रहे सरदार सरोवर बांध का निर्माण तत्काल रोके जाने की मांग के साथ धरने पर बैठे हुए हैं.

मेधा पाटकर की तबीयत ख़राब होने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह उनसे मिलने के लिए जंतर मंतर पहुंचे जहां वह भूख हड़ताल कर रही हैं.

सिंह के अलावा कई और सामाजिक कार्यकर्ता भी मेधा को देखने पहुंचे.

जल संसाधन मंत्री सैफुद्दीन सोज़ ने धरने पर बैठे लोगों को आश्वासन दिया है कि इस बांध परियोजना से विस्थापित हो रहे सभी 35000 लोगों का पुनर्वास कराया जाएगा. सोज़ ने कहा कि वो जल्दी ही ज़मीनी स्थिति देखने मध्य प्रदेश जाएंगे.

कुछ दिनों पहले सरदार सरोवर बांध की ऊंचाई 110 मीटर से 121 मीटर करने के विरोध में ये प्रदर्शन हो रहे हैं.

धरना देने वालों का कहना है कि बांध की ऊंचाई बढ़ाने का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले की अवहेलना करता है जिसमें कहा गया था कि जब तक सभी विस्थापितों का पुनर्वास नहीं हो जाता तब तक निर्माण कार्य न बढ़ाया जाए

सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर 17 अप्रैल को फिर सुनवाई करने वाली है.

बुकर पुरस्कार विजेता अरुंधती रॉय भी इस मौके पर मौजूद थीं और बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा," सरकार ने कोई आश्वासन नहीं दिया है.हम चुपचाप मर नहीं सकते. अभी अभी मंत्री ने कहा कि वो नर्मदा घाटी में जाएंगे लेकिन काम अभी भी चल रहा है."

अरुंधती ने यह भी कहा कि उन्हें अदालत की अवमानना के आरोप में एक दिन की जेल हुई थी तो फिर क्यों नहीं धरना देने वाले सभी लोगों को जेल में भेजा जाता.

सरदार सरोवर परियोजना की नींव भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने रखी थी लेकिन यह पूरी परियोजना क़ानूनी पचड़ों में फंस कर रह गई.

अधिकारियों का कहना है कि सूखा पीड़ित सौराष्ट्र क्षेत्र के लिए बांध होना ज़रुरी है.

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