| नर्मदा बाँध में डूब जाएगा हरसुद कस्बा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य प्रदेश के पश्चिमी क्षेत्र के खंडवा ज़िले में बनाए गए इंदिरा सागर बाँध परियोजना से हरसुर कस्बा अगले एक सप्ताह में डूब जाएगा. साथ ही इससे 112 गाँव प्रभावित होंगे. बाँध की ऊँचाई 245 मीटर है और बाँध में पानी भर चुका है. विस्थापित घर छोड़कर नए पुनर्वास स्थल छनेरा गाँव जा रहे हैं. मुख्यमंत्री उमा भारती का कहना है कि प्रदेश को 1000 मेगावाट बिचली की ज़रूरत है और ये बिजली इस बाँध से बनेगी. मुआवज़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरसुद गाँव के डूबने से प्रभावित होनेवाले विस्थापितों को मुआवज़ा दिया जाएगा जिसकी ज़िम्मेदारी राज्य सरकार के एक मंत्री को दी गई है. उमा भारती ने विस्थापितों के लिए आँदोलन करनेवाले संगठन नर्मदा बचाओ आँदोलन की नेता मेधा पाटकर से अपील की है कि वे विकास का कोई वैकल्पिक रास्ता बताएँ. उधर विस्थापितों के लिए आँदोलन करनेवाले संगठन नर्मदा बचाओ आँदोलन ने कहा है कि प्रभावितों को ज़मीन के बदले ज़मीन देने का वायदा किया गया था मगर इसके बजाय उन्हें आर्थिक मुआवज़ा दिया जा रहा है. बाँध पश्चिमी मध्यप्रदेश के खंडवा ज़िले के पुनासा कस्बे के पास बाँध बनाने की परियोजना 1971 की है. हरसुद को बचाने के लिए एक सुरक्षा दीवार बनाने की भी योजना थी लेकिन स्थानीय लोगों ने इसे स्वीकार नहीं किया. विस्थापितों के लिए केंद्र का निर्माण 22 किलोमीटर दूर छनेरा गाँव में किया गया मगर वहाँ न बिजली पहुँची है न वहाँ पर्याप्त पानी है. एक विस्थापित महिला सुल्ताना ने कहा,"पहले से मुआवज़े के पैसे दे देते तो हम मकान बनवा लेते". हरसुद के विस्थापितों के लिए बने केंद्रों में तमाम अव्यवस्थाओं के लिए मुख्यमंत्री आचार संहिता को कारण बताती हैं मगर वहाँ के हालात देखकर लगता यही है कि हरसुदवासियों के साथ न्याय होगा इसमें संदेह है. |
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