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बीजेपी में बढ़ सकती है आंतरिक कलह | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी में किए गए बड़े बदलाव पार्टी की अंदरुनी कलह और सत्ता के लिए खींचतान को दर्शाते हैं. पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने उन्हें चुनौती देने वाले दो नेताओं नरेंद्र मोदी और अरुण जेटली को महत्वपूर्ण पदों से हटा दिया है. जहां मोदी को संसदीय बोर्ड से हटाया गया वहीं जेटली को प्रवक्ता पद से मुक्त कर दिया गया है. हालांकि पार्टी ने स्पष्ट किया है कि संसदीय बोर्ड में मोदी एकमात्र मुख्यमंत्री थे इसलिए उन्हें अतिरिक्त ज़िम्मेदारी से हटाया गया है. इसी तरह जेटली को एक अन्य ज़िम्मेदारी दी गई है. उन्हें पार्टी के संसदीय बोर्ड का सचिव बनाया गया है. राजनाथ के बदलावों का पार्टी की ओर से पूरा बचाव किया जा रहा है लेकिन जानकारों की राय इससे अलग है. विश्लेषक मानते हैं कि अंदरुनी सत्ता संघर्ष का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि राजनाथ को ये फ़ैसले करने में महीने भर से अधिक का समय लगा है. उल्लेखनीय है कि जब साल भर पहले पार्टी अध्यक्ष पद का चुनाव होना था तो राजनाथ के अलावा मोदी और जेटली के नाम भी चर्चा में थे. जहां गुजरात में अपने काम और आक्रामक हिंदुत्ववादी छवि वाले नरेंद्र मोदी पार्टी के कट्टरपंथियों में खासे लोकप्रिय हैं, वहीं अरुण जेटली पार्टी की मध्यवर्गीय वोट बैंक को आकर्षित करते हैं. जेटली की जगह राजीव प्रताप रूडी को प्रवक्ता बनाया गया है. इसके अलावा प्रवक्ताओं की पुरानी टीम में प्रकाश जावडेकर और रवि शंकर प्रसाद बने रहेंगे. नई टीम बनाने में राजनाथ सिंह को काफी समय लगा है और कहा जा रहा है कि इसके पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से आए संजय जोशी पर खींचतान प्रमुख कारण थी. पार्टी का समर्थन करने वाले एक अख़बार का कहना है कि राजनाथ सिंह संजय जोशी को टीम में बनाए रखना चाहते थे लेकिन संघ इसके पक्ष में नहीं था. उल्लेखनीय है कि वर्ष 2006 में संजय जोशी का नाम एक सेक्स स्कैंडल में आया था और उसके बाद से ही संघ उनके पक्ष में नहीं था. जोशी के स्थान पर संघ प्रचारक रामलाल अग्रवाल को संगठन महासचिव का पद दिया गया है जो पार्टी और संघ के बीच सेतु का काम करेंगे. जानकारों का कहना है कि इन बदलावों का उत्तर प्रदेश के चुनावों पर असर नहीं पड़ेगा क्योंकि मोदी और जेटली की यूपी के चुनावों में बड़ी भूमिका नहीं है. तो फिर मोदी और जेटली के पर क्यों कतरे गए. कुछ विश्लेषक मानते हैं कि राजनाथ सिंह ने अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए ये क़दम उठाया है और इस क़दम से आने वाले दिनों में पार्टी की आंतरिक कलह और बढ़ सकती है. राजनाथ सिंह ने बड़ा फ़ैसला किया है और उनके फ़ैसले को मापा जाएगा उनकी सफलता से और उनकी सफलता को जोड़ कर देखा जा रहा है उत्तर प्रदेश के चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन से. | इससे जुड़ी ख़बरें भाजपा फिर राम की शरण में23 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस फिर 'हिंदुत्व' की ओर लौटने के संकेत22 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस भाजपा ने परमाणु संधि का विरोध किया10 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस संसद में गूँजा अयोध्या का मामला06 दिसंबर, 2006 | भारत और पड़ोस राजनाथ सिंह दोबारा भाजपा अध्यक्ष बने26 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस दिल्ली में सड़कों पर उतरी भाजपा22 नवंबर, 2006 | भारत और पड़ोस झारखंड में तीन विधायक निलंबित17 अक्तूबर, 2006 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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