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बर्मा के मुद्दे पर मेनन से मिले गम्बारी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी ने बर्मा में लोकतंत्र की बहाली के मसले पर सोमवार को दिल्ली में भारत के विदेश सचिव शिवशंकर मेनन से मुलाक़ात की. रविवार की रात भारत पहुँचे गम्बारी के इस मुद्दे पर विदेश मंत्री प्रणब मुखर्जी से भी बातचीत करने की संभावना है. गम्बारी की यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय भारत पर बर्मा में लोकतंत्र की बहाली के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने के लिए दबाव बना रहा है. दबाव अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने हाल ही में भारत और चीन से अपील की थी. उन्होंने कहा था कि वे अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर बर्मा के सैनिक शासकों पर लोकतंत्र समर्थकों का दमन रोकने और उनसे बातचीत करने के लिए दबाव बनाएँ. भारत और चीन बर्मा के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले दो प्रमुख नज़दीकी पड़ोसी देश हैं. बर्मा की स्थिति पर नज़र रखने के लिए विशेष दूत नियुक्त गम्बारी इस मसले पर बातचीत और समर्थन के लिए इन दिनों एशियाई देशों की यात्रा पर हैं. भारत आने से पहले गम्बारी थाईलैंड, मलेशिया और इंडोनेशिया का दौरा कर चुके हैं. इस मिशन पर बातचीत के लिए उनका अगला पड़ाव चीन और जापान होंगे. गम्बारी के अगले माह के मध्य तक एक बार फिर बर्मा जाने और सैन्य शासकों से बातचीत करने की योजना है. सितंबर में रंगून में लोकतंत्र बहाली के समर्थन में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर सैनिकों के गोलियां चलाने की घटना के बाद गम्बारी पहली बार बर्मा गए थे. सैन्य शासन उल्लेखनीय है कि बर्मा में सैन्य शासन लागू है और वहाँ पिछले कुछ दिनों से सैन्य शासन के ख़िलाफ़ लोकतंत्र के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं. इन प्रदर्शनों और अभियानों को दबाने के लिए हुए बल प्रयोग और हिंसा में दर्जन भर से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोगों को जेलों में डाल दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से बर्मा की ताज़ा राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की जा चुकी है. इसके बावजूद देश में सैनिक शासन की ओर से कई लोकतंत्र समर्थकों को गिरफ़्तार करके रखा गया है. सैनिक शासन पर अमानवीय तरीके से लोकतंत्र समर्थकों के अभियान से निपटने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा पर अमरीका ने और प्रतिबंध लगाए19 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में सैन्य शासन के समर्थन में रैली13 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सुरक्षा परिषद ने बर्मा की निंदा की11 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस लोकतंत्र समर्थकों के हिंसक दमन की निंदा06 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में हालात सुधरने के आसार कमः गम्बारी05 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सैनिक शासक सू ची से मिल सकते हैं04 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में रात भर हुई गिरफ़्तारियाँ04 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा पर भारत की दुविधा और चुप्पी26 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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