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लोकतंत्र समर्थकों के हिंसक दमन की निंदा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूरोपीय देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें बर्मा में लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों को हिंसक तरीके से दबाने की निंदा की गई है. अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस द्वारा तैयार इस प्रस्ताव में बर्मा में राजनीतिक बंदियों की तत्काल रिहाई की माँग की गई है. साथ ही सैन्य शासकों और विपक्षी नेताओं के बीच वार्ता शुरु करने की अपील भी की गई है. संयुक्त राष्ट्र में अमरीका के राजदूत ज़ल्मे खलीलज़ाद ने कहा कि वह इस मसले पर आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन चीन ने बर्मा के सैन्य शासकों पर अत्यधिक दबाव डालने के प्रति आगाह किया है. चिंता इससे पूर्व, बर्मा के हालात का जायज़ा लेकर लौटे विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी ने सुरक्षा परिषद को हालात की जानकारी दी. न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बातचीत करते हुए उन्होंने मनमाने ढंग से हो रही गिरफ्तारियों पर गहरी चिंता व्यक्त की. गम्बारी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और समूचे अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को सुरक्षा तंत्र से जुड़े लोगों के दुर्व्यवहार, ख़ासतौर से रात के कर्फ़्यू के दौरान लोगों के घरों पर डाले जा रहे छापों, मारपीट, गिरफ़्तारियों और लोगों के लापता होने की ख़बरों से बहुत चिंता है. गम्बारी का कहना था, “पिछले कुछ सप्ताहों में हुई दुखद घटनाओं ने बर्मा के लिए एक ऐतिहासिक अवसर पैदा किया है. पूरी दुनिया की नज़र बर्मा पर है. सब देख रहे हैं कि बर्मा की सैनिक सरकार जनता की भलाई को ध्यान में रखते हुए अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह किस तरह करती है." उन्होंने कहा कि उन्होने बर्मा की सरकार को बताया कि संयुक्त राष्ट्र प्रदर्शनों के दमन को लेकर कितना चिंतित है और माँग करता है कि सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा किया जाए. उन्होंने उन ख़बरों का भी ज़िक्र किया जिसके मुताबिक प्रदर्शनों के दौरान गिरफ़्तार किए गए भिक्षुओं को रंगून से बाहर ले जाया जा रहा है. अमरीकी चेतावनी संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटन और अमरीका के राजदूतों ने गम्बारी से आग्रह किया कि वे जल्दी से जल्दी बर्मा लौटें. उनकी रिपोर्ट सुनने के बाद अमरीकी राजदूत ज़ल्मे ख़लीलज़ाद ने बर्मा की सरकार को चेतावनी दी कि अमरीका प्रतिबंध प्रस्ताव लाने को तैयार है. ख़लीलजाद ने कहा, “अगर बर्मा की सरकार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की मांगो पर समय रहते सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं करती है तो अमरीका प्रतिबंध लागू करने का प्रस्ताव सुरक्षा परिषद में लाने को तैयार है. सरकार गम्बारी के साथ पूरा सहयोग करे यह दबाव डालने के लिए हमें हथियारों पर प्रतिबंध जैसे उपायों के लिए तैयार रहना चाहिए.” गम्बारी ने कहा कि वे स्थिति का आकलन करने नवंबर में फिर बर्मा जाएंगे. संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून ने कहा है कि एक बार की यात्रा से सफलता को नहीं आंका जा सकता, यह एक प्रक्रिया है जिसे तब तक जारी रखा जाएगा जब तक एक शांतिपूर्ण, संगठित लोकतांत्रिक और ख़ुशहाल बर्मा का लक्ष्य प्राप्त नहीं होता जिसमें मानवाधिकारों का पूरा सम्मान किया जाए. | इससे जुड़ी ख़बरें सैनिक शासक सू ची से मिल सकते हैं04 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के सैन्य शासक से मिले गम्बारी02 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना भारत भी बर्मा पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़02 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में बौद्ध मठ 'सील' किए गए28 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा पर भारत की दुविधा और चुप्पी26 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगेंगे24 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में लोकतंत्र समर्थक नेता गिरफ़्तार26 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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