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सैनिक शासक सू ची से मिल सकते हैं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा के सरकारी टेलीविज़न के मुताबिक सैनिक शासक, जनरल थान श्वे सिद्धांत रूप से लोकतंत्र समर्थक नेता सू ची से मिलने को तैयार हो गए हैं. हालांकि इसके लिए सू ची के सामने एक शर्त भी रखी गई है. जानकारी के मुताबिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत की स्थिति बने इसके लिए सू ची को बर्मा के ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों को जारी अपना समर्थन वापस लेना होगा. बर्मा के सैनिक शासन की ओर से रखी गई इस पेशकश को मानने की स्थिति में ही लोकतंत्र समर्थक नेता से बातचीत की स्थितियां बन सकती हैं. पिछले 15 वर्षों के दौरान यह पहला मौका है जब सैनिक शासक ने लोकतंत्र समर्थक सू ची से मिलने की मंशा जताई है. उल्लेखनीय है कि बर्मा में सैन्य शासन लागू है और वहाँ पिछले कुछ दिनों से सैन्य शासन के ख़िलाफ़ लोकतंत्र के समर्थक प्रदर्शन कर रहे हैं. इन प्रदर्शनों और अभियानों को दबाने के लिए हुए बल प्रयोग और हिंसा में दर्जन भर से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोगों को जेलों में डाल दिया गया है. संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ओर से बर्मा की ताज़ा राजनीतिक स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है. बर्मा को लेकर चिंता उधर अमरीकी गृह मंत्रालय की ओर से इस बात की पुष्टि कर दी गई है कि बर्मा में मौजूद उनके वरिष्ठतम राजदूत को बर्मा की सैनिक सरकार की ओर से शुक्रवार को मुलाक़ात का न्यौता दिया गया है.
बर्मा सरकार की ओर से यह ताज़ी घोषणा ऐसे समय में की गई है जब संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी बर्मा की स्थिति से संयुक्त राष्ट्र महासचिव को अवगत करवाने वाले हैं. इब्राहिम गम्बारी को संयुक्त राष्ट्र की ओर से विशेष दूत की हैसियत से बर्मा भेजा गया था और वहाँ के हालात का जायज़ा लेने के बाद गम्बारी अपनी राय संयुक्त राष्ट्र महासचिव के सामने रखने वाले हैं. इसके बाद शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी इस बारे में चर्चा की जाएगी. उधर बर्मा में पिछले कुछ दिनों में रात को हुई धरपकड़ में दौरान गिरफ़्तार हुए संयुक्त राष्ट्र के एक सदस्य को भी रिहा कर दिया गया है. हालांकि हज़ारों की तादाद में अभी भी लोग हिरासत में हैं. इससे पहले रंगून के निवासियों ने बताया था कि पुलिस ने बुधवार को रात भर गिरफ़्तारियाँ की हैं. बीबीसी संवाददाता क्रिस हॉग का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि बर्मा के सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनों की रिकॉर्डिंग कर ली थी और अब प्रदर्शनकारियों की सूची बनाकर उन पर कार्रवाई की जा रही है. उनका कहना है कि यह लोगों को धमकाने की तरकीब हो सकती है जो कि काम भी कर रही है. उधर अमरीकी राजनयिकों का कहना है कि उन्होंने 15 बौद्धमठों का दौरा किया और सब ख़ाली मिले. कुछ और बौद्धमठों में घेरा लगा दिया गया था और वहाँ सुरक्षाकर्मी तैनात थे. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा के सैन्य शासक से मिले गम्बारी02 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना भारत भी बर्मा पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़02 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में बौद्ध मठ 'सील' किए गए28 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा पर भारत की दुविधा और चुप्पी26 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगेंगे24 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में लोकतंत्र समर्थक नेता गिरफ़्तार26 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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