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बर्मा में रात भर हुई गिरफ़्तारियाँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
रंगून के निवासियों का कहना है कि पुलिस ने बुधवार को रात भर गिरफ़्तारियाँ की हैं. यह पता नहीं चल सका है कि कितने लोग गिरफ़्तार किए गए हैं. लेकिन गुरुवार को दिन में वहाँ सन्नाटा है और आमतौर पर पुलिसकर्मी और सैनिक सड़कों पर नहीं दिख रहे हैं. ऐसा लगता है कि रात को लगने वाले कर्फ़्यू के दौरान सैन्य सरकार उन लोगों को निशाना बना रही है जिन लोगों ने पिछले सप्ताह सरकार विरोधी प्रदर्शनों में हिस्सा लिया था. बीबीसी संवाददाता क्रिस हॉग का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है कि बर्मा के सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनों की रिकॉर्डिंग कर ली थी और अब प्रदर्शनकारियों की सूची बनाकर उन पर कार्रवाई की जा रही है. उनका कहना है कि यह लोगों को धमकाने की तरकीब हो सकती है जो कि काम भी कर रही है. उधर अमरीकी राजनयिकों का कहना है कि उन्होंने 15 बौद्धमठों का दौरा किया और सब ख़ाली मिले. कुछ और बौद्धमठों में घेरा लगा दिया गया था और वहाँ सुरक्षाकर्मी तैनात थे. इस बीच गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र के विशेष दूत इब्राहिम गम्बारी महासचिव बान की मून को बर्मा के नेताओं से हुई बातचीत पर अपनी रिपोर्ट देने वाले हैं. इसके बाद इस हफ़्ते के अंत में सुरक्षा परिषद में इस विषय पर चर्चा होनी है. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा के सैन्य शासक से मिले गम्बारी02 अक्तूबर, 2007 | पहला पन्ना भारत भी बर्मा पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़02 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में बौद्ध मठ 'सील' किए गए28 सितंबर, 2007 | पहला पन्ना बर्मा पर भारत की दुविधा और चुप्पी26 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगेंगे24 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में लोकतंत्र समर्थक नेता गिरफ़्तार26 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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