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बर्मा पर अमरीका ने और प्रतिबंध लगाए | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने बर्मा के सैन्य शासन के ख़िलाफ़ अतिरिक्त प्रतिबंध लगान की घोषणा की है. उन्होंने भारत और चीन से भी कहा है कि वे बर्मा के सैन्य शासन पर दबाव बढ़ाएँ. इसके साथ ही उन्होंने एक बार फिर बर्मा से कहा है कि वह राजनीतिक बंदियों को रिहा करे. पिछले दो महीने में यह दूसरी बार है जब राष्ट्रपति बुश ने बर्मा के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध को कड़ा करने की घोषणा की है. सितंबर में उन्होंने बर्मा के एक दर्जन से अधिक सैन्य शासकों के ख़िलाफ़ यात्रा प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी. इस बार उन्होंने अमरीकी वित्तमंत्रालय से कहा है कि वह बर्मा को होने वाले अमरीकी निर्यात और बर्मा को सहयोग करने वालों को नियंत्रित करे. राष्ट्रपति बुश ने कहा है कि लोकतंत्र समर्थक लोगों के साथ बर्मा के सैन्य शासकों ने जो बर्ताव किया उससे पूरी दुनिया घबराई हुई है. जिन देशों ने पहले ही बर्मा पर प्रतिबंध कड़े कर दिए हैं उनकी तारीफ़ करते हुए राष्ट्रपति बुश ने कहा कि चीन और भारत को और उपाय करना चाहिए. सबकुछ पहले की तरह चलते रहने को स्वीकार नहीं किया जा सकता. | इससे जुड़ी ख़बरें बर्मा में कुछ अहम लोकतंत्र समर्थक रिहा18 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस जापान ने भी बर्मा पर दबाव बढ़ाया16 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा पर नए प्रतिबंधों की सिफ़ारिश15 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में सैन्य शासन के समर्थन में रैली13 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस सुरक्षा परिषद ने बर्मा की निंदा की11 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस अमरीकी दूत बर्मा सरकार से बात करेंगी05 अक्तूबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा के ख़िलाफ़ नए प्रतिबंध लगेंगे24 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस बर्मा में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी22 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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