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रविवार, 07 अक्तूबर, 2007 को 17:55 GMT तक के समाचार
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'यूपीए सरकार अमरीकी दबाव में है'
वामदल
वामदल परमाणु समझौते को तत्काल रोकने की बात कह रहे हैं
परमाणु समझौते पर सोनिया गांधी के ताज़ा बयान को आड़े हाथों लेते हुए वामदलों ने कहा है कि यूपीए सरकार अमरीकी दबाव में आकर काम कर रही है.

रविवार को झज्जर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और केंद्र में सत्तारूढ़ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा था कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते का विरोध करने वाले देश के विकास के दुश्मन हैं.

सोनिया गांधी ने यह भी कहा था कि देश में बिजली की बड़ी किल्लत है और अमरीका से परमाणु समझौता इसी दिशा में एक प्रयास है.

सोनिया गांधी के इस बयान को आड़े हाथों लेते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव एबी बर्धन ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "यूपीए सरकार अमरीकी दबाव में काम कर रही है और इसीलिए इस मुद्दे पर वो जल्दबाज़ी करना चाहती है."

एबी बर्धन, सीपीआई महासचिव
 यूपीए सरकार अमरीकी दबाव में काम कर रही है और इसीलिए इस मुद्दे पर वो जल्दबाज़ी करना चाहते हैं

बर्धन ने कहा कि कांग्रेस की यह दलील एकदम खोखली है कि इस समझौते से देश की बिजली की ज़रूरत का हल निकलेगा. इस बारे में पहले ही काफ़ी कुछ लिखा-प्रकाशित किया जा चुका है कि परमाणु ऊर्जा से केवल 20,000 मेगावाट बिजली उत्पादन बढ़ेगा.

कुछ अन्य समाचार माध्यमों से बातचीत में एबी बर्धन ने यह भी कहा कि अगर देश को समय से पहले चुनाव देखना पड़ता है तो कांग्रेस पार्टी इसके लिए ज़िम्मेदार होगी.

आमने-सामने

वमदलों की इस टिप्पणी और उससे पहले सोनिया गांधी के परमाणु समझौते पर सार्वजनिक रूप से कड़े बयान के बाद अब इस समझौते को लेकर कांग्रेस और वामदल आमने-सामने दिखाई दे रहे हैं.

ग़ौरतलब है कि इससे पहले शनिवार को प्रधानमंत्री निवास पर हुए रोज़ा इफ़्तार में सोनिया गांधी ने पत्रकारों से अनौपचारिक रूप से बातचीत करते हुए कहा था कि अगर चुनाव समय से पहले होते हैं तो कांग्रेस उसके लिए तैयार है.

 पहले वामदल और कांग्रेस यह सोच रहे थे कि परमाणु समझौते पर हो रहे मतभेदों से गुजरात में आगामी चुनावों में भाजपा और नरेंद्र मोदी को कोई लाभ न मिले पर अब दोनों चुनाव के लिए कमर कसते नज़र आ रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि बैठकों, सुलह-समझौतों का दौर ख़त्म हो रहा है
मानिनी चटर्जी, दिल्ली संपादक- टेलीग्राफ़

उधर वामदल लगातार इस बात को दोहराते आ रहे हैं कि अमरीका के साथ परमाणु समझौते के मुद्दे पर वे अपनी राय से पीछे हटने वाले नहीं हैं.

वामदलों का कहना है कि यह परमाणु समझौता राष्ट्रीय संप्रभुता के हित में नहीं है और किसी तरह के दबाव में अमरीका के साथ परमाणु समझौता कतई नहीं किया जा सकता है.

वामदलों और कांग्रेस हाईकमान की ओर से अब सार्वजनिक मंच तक आ रही टिप्पणियों के बाद विश्लेषक लड़ाई को आमने-सामने के तौर पर देख रहे हैं.

टेलीग्राफ़ अख़बार की दिल्ली संपादक मानिनी चटर्जी ने इस बारे में कहा, "पहले वामदल और कांग्रेस यह सोच रहे थे कि परमाणु समझौते पर हो रहे मतभेदों से गुजरात में आगामी चुनावों में भाजपा और नरेंद्र मोदी को कोई लाभ न मिले पर अब दोनों चुनाव के लिए कमर कसते नज़र आ रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि बैठकों, सुलह-समझौतों का दौर ख़त्म हो रहा है."

दोनों ओर से बयानबाज़ी ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के प्रमुख अगले सप्ताह भारत यात्रा पर आने वाले हैं.

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