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सोमवार, 01 अक्तूबर, 2007 को 15:55 GMT तक के समाचार
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सरकार को करात की एक और चेतावनी

वामपंथी नेता सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने केंद्र सरकार को स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि अमरीका के साथ हुए परमाणु समझौते को लागू न किया जाए.

कोलकाता में सीपीएम की केंद्रीय समिति की तीन दिन की बैठक में पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने कहा, "अगर सरकार ऐसा करती है (समझौते को अमल में लाती है) तो हमने उचित फ़ैसला करने की ज़िम्मेदारी पोलित ब्यूरो पर छोड़ दी है."

उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जब संसद में इस परमाणु समझौते के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा नहीं हो जाती तब तक सत्ताधारी गठबंधन (यूपीए) को इंतज़ार करना चाहिए.

उन्होंने कहा कि अब तो इस अहम मसले पर बहस संसद के शीतकालीन सत्र में ही हो सकती है.

करात ने कहा, "संसद का पिछला सत्र भारतीय जनता पार्टी के सांसदों के हंगामे के कारण बाधित रहा था. मैं नहीं जानता कि उन्होंने ऐसा क्या सोचकर किया लेकिन यह मुद्दा इतना गंभीर है कि बिना संसद में पूरी बहस के इस पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता."

समर्थन वापसी

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी सरकार से समर्थन वापस ले सकती है तो इसके जवाब में उन्होंने कहा, "मैं इस मामले में हड़बड़ी में कुछ नहीं कहना चाहता, यह काँग्रेस के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के रवैए पर निर्भर करता है. अब यही देखना है कि वे हमारी राय मानते हैं या नहीं."

 संसद का पिछला सत्र भारतीय जनता पार्टी के सांसदों के हंगामे के कारण बाधित रहा था. मैं नहीं जानता कि उन्होंने ऐसा क्या सोचकर किया लेकिन यह मुद्दा इतना गंभीर है कि बिना संसद में पूरी बहस के इस पर आगे नहीं बढ़ा जा सकता
प्रकाश करात

उन्होंने परमाणु समझौते के मुद्दे के अलावा भी संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को जमकर कोसा, उन्होंने कहा, "न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर अमल के मामले में सरकार का प्रदर्शन बहुत ख़राब रहा है, उनकी नीतियाँ अमीर लोगों और बड़े व्यावसायिक घरानों के फ़ायदे के लिए काम करती हैं, गैस की क़ीमतें और गेहूँ पर सरकार की नीति इसके उदाहरण हैं."

प्रकाश करात ने कहा कि उनकी पार्टी की केंद्रीय समिति ने सर्वसम्मति से कहा है कि वह इस मामले में अगला क़दम न उठाए.

अगले क़दम से करात का आशय परमाणु सुरक्षा पर अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) से होने वाली बातचीत है, वामपंथी पार्टियों का कहना है कि केंद्र सरकार को तब तक आईएईए से बात नहीं करनी चाहिए जब तक कि संसद में पूरी बहस न हो जाए.

करात ने कहा कि वामपंथी दलों की समन्वय समिति और सत्ताधारी दलों के बीच हाइड एक्ट पर विचार-विमर्श हो रहा है क्योंकि इसके दूरगामी प्रभाव भारत की विदेश नीति पर पड़ेंगे.

सीपीएम महासचिव ने कहा, "हमारी पार्टी या भारत की वामपंथी पार्टियों का कोई भी व्यक्ति अमरीका के साथ प्रस्तावित इस रणनीतिक रिश्ते को सही ठहरा सकता है."

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