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एनएसजी में भारत पर बातचीत संभव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के सम्मेलन में न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप (एनएसजी) की गुरुवार को होनेवाली बैठक में भारत-अमरीका परमाणु समझौते पर चर्चा हो सकती है. इस बैठक में अमरीका समेत एनएसजी के 45 सदस्य देश शामिल होंगे. इसमें भारत को परमाणु सामग्री उपलब्ध कराने के संबंध में एनएसजी समूह के नियमों में फेरबदल पर शुरुआती बातचीत होने की संभावना है. इसके पहले भारत ने परमाणु करार के क्रियान्वयन के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) और एनएसजी के साथ जल्दी ही किसी समझौते तक पहुँचने पर ज़ोर दिया था. भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के अध्यक्ष काकोदकर इस समय वियना में हैं और वो आईएईए के सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. परमाणु समझौते पर बातचीत वियना में भारतीय पत्रकारों के सवालों पर काकोदकर ने कहा था कि एनएसजी समूह से भारत को रियायत दिलाना अमरीका की ज़िम्मेदारी है. परमाणु समझौते को जल्द लागू करने के लिए भारत को आईएईए के साथ सुरक्षा समझौता करना होगा और एनएसजी के नियमों में बदलाव लाना होगा. काकोदकर ने कहा, ''परमाणु करार को जल्दी पूरा कर लेना सबके हित में होगा. एनएसजी के सभी सदस्य देश भी आईएईए के साथ जल्द किसी समझौते के पक्ष में हैं.'' काकोदकर ने भारत के लिए विशेष सुरक्षा समझौता किए जाने के सवाल पर फिलहाल कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उल्लेखनीय है कि भारत और अमरीका के बीच हुए समझौते को लागू करने की दिशा में आईएईए और न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप के साथ भारत सरकार की बातचीत ज़रूरी है. | इससे जुड़ी ख़बरें संधि परमाणु संप्रभुता पर हमला- भाजपा04 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर बातचीत23 मई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते के मसौदे को हरी झंडी27 जुलाई, 2007 | भारत और पड़ोस परमाणु सहमति का मसौदा सार्वजनिक03 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस 'सामरिक संप्रभुता पर कोई असर नहीं'13 अगस्त, 2007 | भारत और पड़ोस काकोदकर आईएईए की बैठक में शामिल 17 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस आईएईए को बातचीत का इंतज़ार18 सितंबर, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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