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सोमवार, 13 अगस्त, 2007 को 04:29 GMT तक के समाचार
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'सामरिक संप्रभुता पर कोई असर नहीं'
मनमोहन सिंह
प्रधानमंत्री लगातार कहते रहे हैं कि परमाणु संधि भारत के हित में है
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोक सभा में कहा है कि अमरीका के साथ परमाणु समझौता किसी भी तरह से भारत की सामरिक संप्रभुता या क्षमता को सीमित नहीं करता है.

अपने बयान में मनमोहन सिंह का कहना था, "अगर भविष्य में परमाणु परीक्षण करना पड़े और वो देश के हित में होगा, तो परीक्षण करने के अधिकार पर समझौते से कोई असर नहीं पड़ेगा. मैं फिर से कहना चाहता हूँ कि भविष्य में परमाणु परीक्षण करना हमारा फ़ैसला होगा, जो सरकार पर निर्भर करेगा. समझौते में ऐसा कुछ नहीं है जो देश की सुरक्षा के मु्द्दे को लेकर क़ानूनी तौर पर किसी भी सरकार के हाथ बाँध देगा."

 अगर भविष्य में परमाणु परीक्षण करना पड़े और वो देश के हित में होगा, तो परीक्षण करने के अधिकार पर समझौते से कोई असर नहीं पड़ेगा. मैं फिर से कहना चाहता हूँ कि भविष्य में परमाणु परीक्षण करना हमारा फ़ैसला होगा, जो सरकार पर निर्भर करेगा. समझौते में ऐसा कुछ नहीं है जो देश की सुरक्षा के मु्द्दे को लेकर क़ानूनी तौर पर किसी भी सरकार के हाथ बाँध देगा
मनमोहन सिंह

मनमोहन सिंह ने संसद में भारी शोरगुल के बीच बयान दिया.

क़रीब बीस मिनट के प्रधानमंत्री के बयान के दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारे लगाते रहे.

बीजेपी ने ‘परमाणु संधि धोखा है’ और ‘न्यूकलियर डील वापस लो’ जैसे नारे लगाए और इसी नारेबाज़ी के बीच प्रधानमंत्री ने बयान पढ़ा.

प्रधानमंत्री ने शोरगुल के बीच बयान समाप्त किया जिसके बाद संसद की कार्यवाही चलती रही और विपक्षी सांसद लगातार नारेबाज़ी करते रहे.

समझौते की आलोचना

भारत और अमरीका के बीच बीच 2005 में हुए परमाणु संधि को लागू करने के लिए पिछले दिनों 123 समझौते हुआ है. उसके बाद संसद में प्रधानमंत्री का यह पहला बयान था.

मंत्रिमंडल ने 123 समझौते को मंज़ूरी दे दी है लेकिन वाम दल और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने इसकी कड़ी आलोचना की है.

उल्लेखनीय है कि रविवार को माकपा नेता प्रकाश करात ने कहा था कि परमाणु संधि पर वाम दलों के विरोध से पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है.

उन्होंने यहां तक कहा कि गठबंधन चलाना कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है और ये कांग्रेस से पूछा जाए कि वो सरकार चलाना चाहती है या नहीं.

वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी थी और कहा था कि 'समझौते में बदलाव संभव नहीं है'.

उन्होंने कोलकाता के अंग्रेज़ी दैनिक 'द टेलीग्राफ़' को दिए इंटरव्यू में कहा, "मैंने उनसे कहा कि समझौते पर फिर से बातचीत संभव नहीं है. यह एक सम्मानजक समझौता है, कैबिनेट ने भी इसे मंज़ूरी दे दी है. हम इस पर वापस नहीं लौट सकते. मैंने उनसे कहा कि वे जो चाहते हैं करें. अगर वे समर्थन वापस लेना चाहते हैं तो लें लें."

उधर भारतीय जनता पहले ही परमाणु संधि का विरोध करती रही है और इसे वापस लिए जाने की मांग करती रही है.

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