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बुश की तैयारियों के लिए बर्न्स भारत में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्लू बुश की भारत यात्रा से पहले तैयारियों के लिए अमरीकी विदेश उपमंत्री निकोलस बर्न्स गुरुवार को दिल्ली पहुँच रहे हैं. माना जा रहा है कि वे भारत-अमरीका परमाणु संधि का रास्ता साफ़ करने के लिए भारत आ रहे हैं. मार्च के पहले सप्ताह में राष्ट्रपति बुश को भारत आना है और अभी भी परमाणु संधि के रास्ते में कई रुकावटें हैं. उल्लेखनीय है कि गत वर्ष जुलाई में अपने अमरीका यात्रा के दौरान भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परमाणु मामले में एक समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए थे. हाल ही में निकोलस बर्न्स ने अपने एक बयान में कहा था कि भारत-अमरीका परमाणु संधि का मामला 90 प्रतिशत सुलझ गया है. इस बचे हुए 10 प्रतिशत में कई अहम सवाल हैं. इसमें मुख्य रुप से असैनिक परमाणु ठिकानों की सूची और परमाणु ठिकानों को अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों के लिए खोलना है. अमरीका चाहता है कि ज़्यादा से ज़्यादा परमाणु संयंत्रों को असैनिक संयंत्रों की सूची में डाल दे लेकिन भारत इसके लिए तैयार नहीं है. विश्लेषक मानते हैं कि फ़्रांस के साथ दो दिन पहले हुए परमाणु समझौते से भारत का पक्ष कुछ मज़बूत हुआ है और इसका लाभ अमरीका के साथ संधि में भी होगा. | इससे जुड़ी ख़बरें भारत-फ्रांस के बीच परमाणु समझौता20 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस काकोडकर की चिंताओं पर विचार09 फ़रवरी, 2006 | भारत और पड़ोस भारत-अमरीका परमाणु संधि जटिल20 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस परमाणु समझौते पर सहमति की कोशिश19 जनवरी, 2006 | भारत और पड़ोस 'अमरीका को कोई हक़ नहीं है'03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस 'परमाणु कार्यक्रम के साथ समझौता नहीं'03 अगस्त, 2005 | भारत और पड़ोस भारत ने परमाणु शक्ति बनकर क्या पाया?03 मई, 2005 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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