|
'अमरीका को कोई हक़ नहीं है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के पैट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कहा है कि अमरीका को भारत, ईरान और पाकिस्तान के बीच बिछाई जाने वाली गैस पाइप लाइन के मामले हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है. मणिशंकर अय्यर ने बीबीसी हिंदी से एक विशेष बातचीत में कहा कि अमरीका को कोई इस बारे में कोई आश्वासन नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि अमरीका को ना तो इस बारे में कुछ पूछने का अधिकार है और न ही हमें उनकी बात सुनने की ज़रूरत है. ग़ौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से ये चर्चा गरम थी कि भारत ने अमरीका से परमाणु ईंधन मिलने के समझौते के बदले में गैस पाईप लाईन के मुद्दे पर कोई आश्वासन दे दिया है. मणिशंकर अय्यर ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने ये स्पष्ट कर दिया कि पाइप लाईन के मुद्दे का संबंध सिर्फ़ भारत, पाकिस्तान और ईरान से है और किसी अन्य देश को इसमें दख़ल देने की ज़रूरत नहीं है. मणिशंकर अय्यर ने ये स्पष्ट कर दिया कि न कोई आश्वासन मांगा गया था और न ही कोई आश्वासन दिया गया था. ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने जुलाई में अमरीका की यात्रा की थी जिस दौरान दोनों देशों के बीच परमाणु सहयोग के समझौते पर दस्तख़त किए गए थे. गैस पाइपलाइन के मुद्दे पर भारत और ईरान के अधिकारीयों के बीच बुधवार को दिल्ली में बातचीत हुई. मणिशंकर अय्यर ने उम्मीद जताई है कि गैस पाइप लाइन चालू करने का सपना जल्दी साकार होगा. 2,600 किलोमीटर लंबी यह गैस पाइप लाइन बनाने में क़रीब चार अरब डालर का ख़र्च आएगा और भारत की उर्जा की ज़रुरत को कुछ हद तक आसान करेगा. भारत अपनी प्राक्रृतिक गैस की ज़रूरत का 50 फ़ीसदी उत्पादन करता है और 70 फ़ीसदी तेल निर्यात भी करता है. वर्ष 2020 तक भारत की ऊर्जा की ज़रूरत दोगुनी होने की संभावना है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||