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शुक्रवार, 29 जुलाई, 2005 को 10:37 GMT तक के समाचार
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'अमरीकी रुख़ देखने के बाद ही अमल'

मनमोहन सिंह और जॉर्ज बुश
मनमोहन सिंह ने अमरीका यात्रा को सफल बताया
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में कहा है कि भारत तथा अमरीका के बीच साझा बयान पर अमल तभी होने देंगे जब अमरीका अपने वादों पर अमल करेगा.

प्रधानमंत्री ने सांसदों को बताया कि दोनों देशों के बीच बयान में ऐसा कुछ नहीं है जिससे भारत के “सामरिक परमाणु कार्यक्रम” या उसके “स्वायत्त नियंत्रण” पर अंकुश लगे.

ऐसा नज़र आया कि प्रधानमंत्री ने अपने मित्र वामदलों और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी की उस आलोचना के जवाब में यह सब कुछ कहा जिसमें उन्होंने कहा था कि बिना किसी ठोस आश्वासन के भारत ने अपने सामरिक हितों को ताक पर रख दिया है.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने यह स्वीकार किया कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के प्रयास का अमरीका समर्थन नहीं कर रहा है.

लेकिन उनके अनुसार, "मुझे पूरा विश्वास है कि आने वाले दिनों में अमरीका अपनी राय बदल लेगा."

उनके अनुसार संयुक्त बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को 1945 के बाद, बदले विश्व परिपेक्ष्य को प्रतिबिंबित करना होगा. प्रधानमंत्री के अनुसार उन्हें यह आशान्वित करता है.

राजनीतिक दलों का कहना है कि भारत, अपनी सबसे बड़ी राजनयिक पहल पर भी अमरीका से समर्थन हासिल नहीं कर पा रहा है.

लेकिन बिना अमरीकी संसद की सहमति के भारत अमरीका को हर हाल में ख़ुश रखने के लिए उतावला नज़र आ रहा है.

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