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वामदलों ने परमाणु समझौते की निंदा की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वामपंथी दलों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अमरीका यात्रा के दौरान हुए परमाणु समझौते की कड़ी आलोचना की है. वामपंथी दलों ने अमरीका के वादों पर शंका जताई है. वामदलों ने कहा कि इससे शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए स्वतंत्र परमाणु तकनीक में बाधा आ सकती है. ग़ौरतलब है कि वामपंथी दल मनमोहन सिंह के नेतृत्ववाली यूपीए सरकार को समर्थन दे रहे हैं. दूसरी ओर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने एक बयान जारी कर अमरीका के साथ हुए परमाणु समझौते को आड़े हाथों लिया है. उनका कहना है कि इस समझौते से देश की सुरक्षा पर दूरगामी असर पड़ेगा. सीपीएम और सीपीआई दोनों ने अमरीका के साथ हुए समझौते पर शंका जाहिर की है. सीपीआई का कहना है कि अमरीका ने न तो भारत के सुरक्षा परिषद के दावे को माना है और न ही परमाणु संपन्न देश का दर्जा दिया है. अमरीका ने भारत को केवल 'उन्नत परमाणु तकनीक' वाला देश कहा है. अमरीका परमाणु ग्रुप वाले देशों से बात करने के बाद और अमरीकी संसद से पारित होने के बाद तारापुर परमाणु संयंत्र को ईंधन की आपूर्ति करेगा. लेकिन इसके बदले भारत परमाणु विस्फोट न करने की अपनी नीति जारी रखने पर सहमत हो गया है. साथ ही उसने परमाणु संयंत्रों को अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी से निरीक्षण करवाने पर सहमति दे दी है. वामदलों का कहना है कि बिना संसद,यूपीए और वामपंथी दलों को भरोसे में लिए देश की परमाणु नीति में बदलाव किया गया है. सीपीएम का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से यह नीति चली आ रही थी और इसे इस समझौते से आगे बढ़ाया है. उनका कहना था कि इसके पहले एनडीए सरकार क्लिंटन प्रशासन के साथ 'लोकतंत्र के गठबंधन' में शामिल हुई थी. समझौता उल्लेखनीय है कि अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में पूरे सहयोग का भरोसा दिलाया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीकी राष्ट्रपति के बीच मुलाक़ात के बाद जारी किए गए के साझा बयान में कहा गया था कि बुश प्रशासन अमरीकी कांग्रेस के साथ मिलकर इस संबंध में अपने देश के क़ानूनों और नीतियों को व्यवस्थित करने का प्रयास करेगा. अमरीका के इस फ़ैसले को उसकी नीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है क्योंकि 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण करने के बाद अमरीका ने भारत की निंदा की थी. साथ ही परमाणु तकनीक के क्षेत्र में सहयोग देना बंद कर दिया था. साझा बयान में कहा गया है,"राष्ट्रपति बुश ने मनमोहन सिंह के साथ मुलाक़ात में परमाणु हथियारों के प्रसार पर रोक के लिए भारत की प्रतिबद्धता की सराहना की और कहा कि एक ज़िम्मेदार देश होने के नाते भारत को भी वही सुविधाएँ मिलनी चाहिए जो अन्य देशों को मिल रही हैं." |
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