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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अमरीका रवाना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह महत्वपूर्ण तीन दिवसीय यात्रा पर शनिवार को अमरीका लिए रवाना होते हुए कहा है कि भारत अमरीका के साथ अपने संबंधों को 'बहुत अधिक महत्व' देता है. उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान वह दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग पर विशेष बल देंगे. सोमवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मुलाक़ात राष्ट्रपति जॉर्ज बुश से होगी जिसमें द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की जाएगी. भारत और अमरीका की बातचीत में आतंकवाद का मुद्दा और परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में सहयोग के संबंध में भी बातचीत होगी. भारत का मानना है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ अंतरराष्ट्रीय लड़ाई में अलग-अलग मापदंड नहीं अपनाए जा सकते. भारत पहले ही घोषणा कर चुका है कि आतंकवाद भारत के एजेंडे में प्रमुख रूप से होगा, इसके अलावा आर्थिक संबंधों को मज़बूत करने पर भी ख़ासा ज़ोर होगा. प्रधानमंत्री परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल में सहयोग के संबंध में भी चर्चा करेंगे. भारत के कारोबार जगत की 10 आला हस्तियाँ प्रधानमंत्री के साथ जा रही हैं और वे वॉशिंगटन में भारत-अमरीका व्यापार फोरम की शुरुआत के मौक़े पर मौजूद रहेंगी. इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व टाटा समूह के चेयरमैन रतन टाटा कर रहे हैं. इसके अलावा सूचना तकनीक, ऊर्जा, अंतरिक्ष, आपदा सहयोग, कृषि और विज्ञान व तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग के संबंध में भी चर्चा होगी. सुरक्षा परिषद भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सदस्यता के लिए दावेदारी कर रहा है और ऐसे संकेत हैं कि इसमें उसे अमरीकी समर्थन नहीं मिल पा रहा है. हालाँकि भारत का कहना है कि स्थाई सदस्यता के दावे पर अमरीका को सैद्धांतिक रूप से कोई आपत्ति नहीं है. उल्लेखनीय है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थाई सदस्यता के लिए दावा कर रहे भारत सहित चार देशों के समूह जी4 ने सुरक्षा परिषद के विस्तार से जुड़े प्रस्ताव का मसौदा पेश किया है. भारत के अलावा जापान, ब्राज़ील और जर्मनी जी4 नाम से जाने जा रहे गुट के सदस्य हैं. इसके ज़रिए सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा में रखा जाएगा. |
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