|
आतंकवाद के ख़िलाफ़ एकजुटता पर ज़ोर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमरीकी संसद को संबोधित करते हुए कहा है कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में दोनों देशों को एकजुट रहना होगा. अमरीकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए उन्होंने मंगलवार को कहा कि लोकतंत्र होने के नाते दोनों ही देश उनके निशाने पर हैं जो स्वतंत्रता के विरोधी हैं. मनमोहन सिंह ने कहा कि भारत और अमरीका ने बहुत भुगता है और दोनों को ही आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में एकजुट रहने की ज़रूरत है. उन्होंने लोकतंत्र, आज़ादी और क़ानून से सम्बद्ध दोनों देशों के साझा मूल्यों पर ज़ोर दिया. डॉक्टर मनमोहन सिंह ने आर्थिक विकास की ज़रूरत पर ज़ोर दिया और कहा कि अब भारत ने स्वयं को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर लिया है और उसे विदेशी निवेश आकर्षित करने की ज़रूरत है. तकनीकी सहयोग उन्होंने नई परमाणु ऊर्जा सहित नई तकनालाजी और ऊर्जा के स्रोतों को विकसित किए जाने की ज़रूरत बताई और इस क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अमरीका की पेशकश का स्वागत किया. भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि चरमपंथी गतिविधियों को हमारे खुले समाज की स्वतंत्रता नष्ट करने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.
हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में 'आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई' की अलग-अलग परिभाषा और हालात नहीं हो सकते हैं. अमरीकी संसद कांग्रेस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इस मामले पर नरमी नहीं बरती जा सकती क्योंकि अगर ऐसा होता है तो 'आतंकवाद' हमारे खुले समाजों में मौजूद स्वतंत्रता को इस्तेमाल करके इसे ही तहस-नहस कर सकता है. मनमोहन सिंह ने कहा, "भारत और अमरीका दोनों ने ही आतंकवाद के गंभीर ख़तरों का अनुभव किया है और दोनों ही देशों को इसे अपनी साझी चुनौती बनाना चाहिए." प्रधानमंत्री ने कहा कि किसी भी परेशानी या मुश्किल को चरमपंथी गतिविधियों की वजह नहीं बताया जा सकता. ग़ौरतलब है कि भारत और अमरीका ने परमाणु तकनीक के हस्तांतरण के बारे में एक समझौता किया है और इस समझौते के तहत भारत के परमाणु संयंत्रों को ईंधन भी मिलेगा. अमरीकी संसद कांग्रेस के संयुक्त अभिवेशन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने देश में आर्थिक सुधारों के लिए भी अपना संकल्प दोहराया. उन्होंने विश्व व्यापार संगठन के दोहा दौर की बातचीत के बाद हुए समझौते को लागू करने में अमरीका और अन्य सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम करने का भरोसा दिलाया. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||