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मनमोहन सिंह बुश से मिलने पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने दल बल के साथ जब सेंट एंड्रयूज़ हवाई अड्डे पर उतरे तो रविवार की उमस भरी दोपहरी में वाशिंगटन उन्हें घर सा ही लगा होगा. लेकिन सोमवार की सुबह अलग होगी. स्वागत ज़रूर ऐतिहासिक होगा क्योंकि अमरीकी राष्ट्रपति के निवास स्थान व्हाइट हाउस के साउथ लॉन पर बहुत कम राष्ट्राध्यक्षों के लिए स्वागत समारोह आयोजित होता है. भारतीय दूतावास के एक अधिकारी का कहना है कि बुश के दूसरे सत्र का वहाँ ये पहला स्वागत समारोह होगा. लेकिन दुनिया की नज़रों से अलग जब बुश और भारतीय प्रधानमंत्री सोमवार को स्थानीय समय से लगभग दस बजे आमने सामने होंगे तो सामने होंगे कुछ कठिन सवाल. दो हफ़्ते पहले तक जो अमरीका भारत को संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता का हक़दार मानता था उसी अमरीका ने प्रधानमंत्री की यात्रा से ठीक पहले कह दिया है कि वो न केवल संयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता बढ़ाने के ख़िलाफ़ है बल्कि वो दूसरों से भी इसका विरोध करने की अपील करेगा. भारतीय विदेश मंत्रालय के अधिकारी ज़रूर ये दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि इस मामले से प्रधानमंत्री की यात्रा पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि कुछ खटास तो आई ही है. और सोमवार को बुश और मनमोहन सिंह की मुलाक़ात के बाद ऐसी कोई बात दिखे नहीं उसकी तैयारी रविवार को देर शाम तक होती रही. साझे बयान की तैयारी भारतीय विदेश मंत्री नटवर सिंह, विदेश सचिव श्याम शरण और अमरीकी विदेश मंत्री कोडोलीज़ा राईस काफ़ी देर तक एक साझा बयान की तैयारी में लगे रहे. अनुमान लगाया जा रहा है कि इसमें परमाणु उर्जा के क्षेत्र में अमरीका का भारत के साथ सहयोग, आतंकवाद और व्यापार के क्षेत्र में साझेदारी को काफ़ी प्रमुखता दी जाएगी. 1998 में परमाणु परीक्षण के बाद से अमरीका ने भारत पर इस क्षेत्र में प्रतिबंध लगा रखा है. स्थिति यहाँ तक आ पहुंची है कि भारत अपने तारापुर परमाणु भट्टी के लिए अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से भी इंधन नहीं ख़रीद सकता. विश्लेषकों का कहना है कि ये प्रतिबंध यदि हट जाता है तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए ये एक सफल द्विपक्षीय दौरा साबित हो सकता है. व्यापार और कारोबार दोनों देशों के बीच व्यापार और कारोबार के क्षेत्र में भागीदारी और मज़बूत करना भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के एजेंडा पर है. सोमवार को ही उनके साथ भारतीय व्यापार जगत से रतन टाटा, मुकेश अंबानी जैसे कई बड़े नाम और अमरीका में स्थित भारतीय मूल के कई मुख्य कार्यकारी अधिकारी भी व्हाइट हाउस में बुश से मुलाक़ात करेंगे. वाशिंगटन में मैने बात की यू एस इंडिया पोलिटिक्ल एक्शन कमिटी के एक वरिष्ठ सदस्य संजय पुरी से जो स्वयं भी एक सीइओ हैं. संजय पुरी का कहना है,"इस यात्रा के दौरान यहाँ मौजूद भारतीय मूल के व्यापारी भारत का एक उभरता हुआ चेहरा पेश करना चाहते हैं." और यदि यहाँ प्रधानमंत्री के स्वागत में होनेवाले कार्यक्रमों और समारोहों में जुटनेवाली भीड़ को इस यात्रा की सफलता का मापदंड मानें तो लगता है कि यात्रा शुरू होने से पहले ही हाउसफ़ुल के बोर्ड टंग चुके हैं और मनमोहन सिंह भले ही कुछ मायूस माहौल में आए हों, वो लौटेंगे एक उम्मीद के साथ. |
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