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सरकार 'कश्मीरियों' से बातचीत को तैयार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने कहा है कि उनकी सरकार उन लोगों के साथ बातचीत के लिए तैयार है जिन्होंने जम्मू कश्मीर में 2002 में हुए विधान सभा चुनाव में भाग नहीं लिया था. दुनिया के आठ सबसे अमीर देशों के संगठन जी-8 की बैठक में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी नेताओं के साथ उनकी सार्थक बातचीत हुई है, अलबत्ता इस बैठक में जलवायु परिवर्तन के महत्वपूर्ण मुद्दे पर कोई ठोस सहमति नहीं हो सकी. प्रधानमंत्री को जी-8 देशों की स्कॉटलैंड में हुई दो दिन की बैठक के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था. बुधवार और गुरूवार को हुई इस बैठक में भाग लेने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शुक्रवार को लंदन लौटने पर भारतीय उच्चायोग में पत्रकारों से बात की. प्रधानमंत्री से पूछा गया कि क्या वह हुर्रियत कान्फ्रेंस की इस माँग से सहमत हैं कि जम्मू कश्मीर में नए चुनाव कराए जाएँ ताकि भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति प्रक्रिया में कश्मीरियों की मध्यस्थता हो सके. इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, "जम्मू कश्मीर में पहले ही चुनाव हो चुके हैं जिसकी सराहना सभी ने की है. मुझे इस बात का अहसास है कि कुछ लोगों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लिया और मैं उन लोगों से बात करने के लिए तैयार हूँ." अयोध्या में हाल ही में हुए चरमपंथी हमले के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों के पास यह सूचना पहले से थी कि वहाँ इस तरह के हमले हो सकते हैं. प्रधानमंत्री ने कहा, "मैं पुलिस और सभी सुरक्षाकर्मियों की सराहना करता हूँ कि उन्होंने बहुत ही मुस्तैदी से काम किया और चरमपंथियों को विवादित स्थल तक पहुँचने से रोक दिया." प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के चरमपंथियों से लड़ने के दो उपाय हैं, "एक तो ये कि पुलिस और सुरक्षा बलों को और प्रशिक्षण दिया जाए और ज़्यादा आधुनिक हथियार दिए जाएँ जिसके लिए हमारी सरकार पहले से कहीं ज़्यादा कोशिश कर रही है. हमारी सरकार इस तरह की घटनाओं को नहीं होने देने के लिए दृढ़ संकल्प है." लंदन में हुए बम धमाकों की भर्त्सना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद एक अंतरराष्ट्रीय समस्या है और इसके ख़िलाफ़ सभी को एकजुट होने की ज़रूरत है. जलवायु परिवर्तन प्रधानमंत्री ने कहा कि जी-8 देशों की इस बैठक में समय की कमी की वजह से जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर कोई सार्थक बहस नहीं हो सकी जिसकी वजह से कोई सहमति भी नहीं हो सकी.
प्रधानमंत्री से जब पत्रकारों ने इस बारे में सवाल किया तो उनका जवाब था, "मैं आपकी राय से सहमत हूँ. शिखर बैठक में समय की कमी के कारण इस मामले पर कोई उद्देश्यपूर्ण बहस नहीं हो सकी." "लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने स्वीकार किया है कि ना सिर्फ़ साफ़ सुथरी तकनीक विकसित करने की ज़रूरत है बल्कि इसे विकासशील देशों को उपलब्ध कराने की भी." जी8 देशों की बैठक के मौक़े पर ही लंदन में हुए बम धमाकों की प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में निंदा की. प्रधानमंत्री ने कहा कि इन धमाकों की वजह से ब्रितानी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर के साथ उनकी पहले से तय रूबरू मुलाक़ात नहीं हो सकी. प्रधानमंत्री ने जी8 की बैठक के बारे में कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति ज़्याक शिराक, जर्मन चांसलर गैरहर्ड श्रोडर, रुस के राष्ट्रपतिव्लादिमीर पुतिन के साथ उनकी सार्थक बातचीत हुई. इनके अलावा ब्राज़ील और जापान के नेताओं के साथ भी उन्होंने महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श किया. प्रधानमंत्री ने बताया कि जी8 देशों की बैठक में सहमति हुई कि सभी देशों को संयुक्त राष्ट्र में सुधारों के लिए एकजुट रहना चाहिए और ख़ासतौर से सुरक्षा परिषद के विस्तार के लिए भी. |
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