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भारत को आमंत्रित करने को सराहा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर भारत और चीन को जी 8 देशों के शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने का ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का फ़ैसला एक समझदारी भरा क़दम है. बीबीसी के संवाददाता एंड्रू मार ने बुश से पूछा कि क्या ये माना जाए कि अमरीका उत्सर्जन की सीमा पर बात करने को तैयार नहीं है. इसके जवाब में बुश का कहना था कि उन्होंने हमेशा यही कहा है कि जलवायु परिवर्तन पर बात करना और कुछ फ़ैसले करना जरूरी है और विभिन्न मुद्दों पर बात की जाएगी. इस संदर्भ में उन्होंने भारत और चीन से बातचीत का स्वागत किया. फिर उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि क्योतो से आगे बढ़ा जाए और ऐसी संधि की जाए जिसमें विकासशील देशों की भी भागीदारी हो. इससे पहले क्योतो संधि को नामंज़ूर करते हुए बुश ने कहा था कि अमरीका उसे नहीं मानता क्योंकि वो अमरीका के हित में नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीका चाहता है कि चूंकि भविष्य में भारत और चीन से पर्यावरण को काफ़ी नुक़सान हो सकता है इसीलिए जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर उसे भी शामिल किया जाए. दूसरी ओर माना जा रहा है कि भारत ये पक्ष रख सकता है कि जी 8 के देश लंबे समय से संसाधनों के दोहन और प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार हैं और अब भी कर रहे हैं. इसीलिए इन्हीं देशों को इसके लिए आगे बढ़कर पहले क़दम बढ़ाने होंगे. |
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