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मंगलवार, 28 जून, 2005 को 06:11 GMT तक के समाचार
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केंद्र सरकार की नीतियों के ख़िलाफ प्रदर्शन
वामपंथी दलों के नेता
वामपंथी दलों ने यूपीए की बैठकों का बहिष्कार करने का फ़ैसला किया है
केंद्र में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे वामपंथी दल तेल की क़ीमतों में वृद्धि और आर्थिक नीतियों का विरोध करने के लिए मंगलवार को देशव्यापी प्रदर्शन किया.

वामपंथी दलों का कहना है कि सरकार न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन कर रही है इसलिए नीतियों पर बदलाव करने के लिए उस पर दबाव डालना ज़रूरी है.

ग़ौरतलब है कि केंद्र की यूपीए सरकार संसद में अपने बहुमत के लिए चार वामपंथी दलों पर निर्भर है.

इस बीच समाचार एजेंसी पीटीआई ने ख़बर दी है कि यूपीए की मुखिया और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने मंगलवार को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत से बात की.

एजेंसी के मुताबिक कांग्रेस की महासचिव अंबिका सोनी ने कहा, "सोनिया गाँधी ने प्रकाश कारत से आज सुबह टेलीफ़ोन पर बात की."

वामपंथी दलों में कुछ सूत्रों का कहना है कि सोनिया गाँधी ने प्रकाश कारत को आश्वसान दिया कि वह एक-दो दिन में शिमला से लौटने के बाद भारत हैवी इलैक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (भेल) के विनिवेश के मुद्दे पर पार्टी सहयोगियों से बात करेंगी और वापमंथी दलों की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की जाएगी.

प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह ने भी सोमवार को प्रकाश कारत से बात की थी.

नाराज़गी

वामपंथी दल हाल ही में तेल की क़ीमतों में की गई वृद्धि से नाराज़ हैं और वे कुछ सरकारी कंपनियों के विनिवेश की सरकार की नीतियों का भी विरोध कर रहे हैं.

 हम सरकार को नहीं बदलना चाहते बल्कि उसकी नीतियां बदलना चाहते हैं, ग़लत नीतियों के ख़िलाफ़ हमारा विरोध जारी रहेगा
एमके पंधे, सीपीएम नेता

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और श्रम संगठन सीटू के महासचिव एमके पंधे ने बीबीसी से बातचीत में कहा, "हम सरकार को नहीं बदलना चाहते बल्कि उसकी नीतियाँ बदलना चाहते हैं, ग़लत नीतियों के ख़िलाफ़ हमारा विरोध जारी रहेगा."

हालाँकि कांग्रेस ने कहा है कि किसी भी मुद्दे पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम का उल्लंघन नहीं हुआ है और वामपंथी दलों ने जो मुद्दे उठाए है वे सोनिया गाँधी की वापसी के बाद सुलझा लिए जाएँगे.

बहिष्कार

भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड का दस प्रतिशत हिस्सा बेचने के सरकार के फ़ैसले के विरोध में रविवार को वामपंथी दलों ने घोषणा की थी कि अब वो यूपीए की समन्वय समिति की बैठकों में भाग नहीं लेंगे.

वामपंथी दलों का प्रदर्शन

इसे लेकर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश कारत ने यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गाँधी को एक खुला पत्र लिखा था और इसकी एक प्रति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भी भेजी थी.

प्रधानमंत्री ने इसी के बाद रविवार की शाम को प्रकाश कारत से फ़ोन पर बातचीत की थी.

कांग्रेस नेताओं के अनुसार प्रधानमंत्री ने वामपंथियों को आश्वासन दिया है कि उनके मुद्दों पर आगे चर्चा की जाएगी.

न्यूनतम साझा कार्यक्रम

कांग्रेस की प्रवक्ता जयंती नटराजन ने कहा है कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और कांग्रेस ये नहीं मानती कि इसका कोई उल्लंघन हुआ है.

 वामपंथियों की असली परीक्षा संसद में होगी कि वो सरकार को बचाने का काम करते हैं या फिर अपने विरोध पर क़ायम रहते हैं
अरूण जेटली, भाजपा महासचिव

उन्होंने कहा कि न्यूनतम साझा कार्यक्रम में लिखा है कि 'नवरत्नों' का निजीकरण नहीं किया जाएगा और वे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम बने रहेंगे. इसे प्रधानमंत्री ने भी बार बार दोहराया है कि उनका निजीकरण नहीं किया जाएगा.

भारतीय जनता पार्टी के महासचिव और प्रवक्ता अरूण जेटली ने वामपंथी दलों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा है कि ये सिर्फ़ दिखावे के लिए आपस में झगड़ रहे हैं.

उन्होंने न्यूनतम साझा कार्यक्रम को भी दिखावा बताया.

उन्होंने कहा कि वामपंथी दलों का समन्वय समिति की बैठकों में न जाने का फ़ैसला सिर्फ़ दिखावा है और ये सार्वजनिक रुप से कहते कुछ और हैं और फिर सरकार का समर्थन ही करते हैं.

अरुण जेटली ने कहा, "वामपंथियों की असली परीक्षा संसद में होगी कि वो सरकार को बचाने का काम करते हैं या फिर अपने विरोध पर क़ायम रहते हैं."

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