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28 जून को विरोध करेंगे वामपंथी | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी का विरोध करते हुए वामपंथी दलों ने 28 जून को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का निर्णय लिया है. वामपंथी दलों ने सरकार से इस बढ़ोत्तरी को तुरंत वापस लेने की माँग करते हुए कहा है कि सरकार को ऐसा कोई ऊपाय निकालना चाहिए जिससे कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतें बढ़ने का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर न पड़े. उल्लेखनीय है कि वामपंथी दलों के सहयोग से चल रही यूपीए सरकार ने वामपंथी दलों के विरोध के बावजूद पेट्रोल की क़ीमतों में ढाई रुपए और डीज़ल की क़ीमतों में दो रुपए की वृद्धि करने का निर्णय लिया है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, आरएसपी और फॉर्वर्ड ब्लॉक ने एक संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि पिछले एक साल में सरकार ने तीसरी बार पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें बढ़ाईं हैं. उन्होंने कहा है कि इस बढ़ोत्तरी से आम आदमी पर बोझ पड़ेगा और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी से उपभोक्ता वस्तुओं की क़ीमतें बढ़ेंगी. वामपंथी दलों का कहना है कि पेट्रोलियम पदार्थों में जो वृद्धि हुई है उसका ताल्लुक़ सिर्फ़ अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की क़ीमतों से नहीं है क्योंकि सरकार ने बजट में एक्साइज़ ड्यूटी बदल दी थी जिसकी वजह से पेट्रोलियम की क़ीमतें बढ़ गईं थी और फिर सेस बढ़ा दी गई थी. वामपंथी दलों ने सरकार को पांच सुझाव देते हुए कहा है कि सरकार यदि ये कदम उठा ले तो पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों में बढ़ोत्तरी की ज़रुरत नहीं पड़ेगी. वामपंथी दलों ने सरकार के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ देश भर में सड़कों पर विरोध प्रदर्शन करने का ऐलान किया है. |
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